MBA, किराये और FD से आय... फिर भी मिल रहा था ₹30 हजार मेंटेनेंस, HC ने बदला फैसला

Edited By Updated: 12 Aug, 2026 01:34 PM

delhi high court  interim maintenance husband wife

दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्नी को दिए जाने वाले अंतरिम गुज़ारा-भत्ते की राशि ₹30,000 से घटाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी है। कोर्ट ने यह फैसला पत्नी की शैक्षणिक योग्यता, उनकी अपनी आय और पति पर बच्चों की आर्थिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए लिया। यह...

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्नी को दिए जाने वाले अंतरिम गुज़ारा-भत्ते की राशि ₹30,000 से घटाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी है। कोर्ट ने यह फैसला पत्नी की शैक्षणिक योग्यता, उनकी अपनी आय और पति पर बच्चों की आर्थिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए लिया। यह राशि 12 अप्रैल 2021 से प्रभावी होगी, जिस दिन पत्नी ने गुज़ारा-भत्ता देने की मांग की थी। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने 11 अगस्त को पति की याचिका पर यह आदेश पारित किया। पति ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 12 अप्रैल 2021 से पत्नी को ₹30,000 प्रति माह अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने का निर्देश दिया गया था। हाई कोर्ट ने याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए राशि में कटौती कर दी।

पति ने गुज़ारे-भत्ते की रकम को चुनौती क्यों दी?
कोर्ट के आदेश के अनुसार, आशुतोष राय अस्थाना और यमिता राय अस्थाना की शादी 2 नवंबर, 1995 को हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। दोनों के बीच मतभेद होने के बाद यमिता ने 9 अप्रैल, 2021 को अपने पति से गुज़ारे-भत्ते की मांग की। फैमिली कोर्ट ने शुरू में 15 जनवरी, 2022 को उन्हें अंतरिम गुज़ारे-भत्ते के तौर पर 25,000 रुपये देने का आदेश दिया था। बाद में, 5 जून, 2024 को कोर्ट ने एक और आदेश पारित किया जिसमें आशुतोष को गुज़ारे-भत्ते की अर्ज़ी की तारीख से 30,000 रुपये प्रति माह देने का निर्देश दिया गया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुज़ारे-भत्ते की रकम क्यों कम की?
आशुतोष ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने गौर किया कि दोनों बच्चे पति के साथ रह रहे हैं और वह उनकी पढ़ाई और अन्य खर्चों का भुगतान कर रहे हैं। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि उनकी बेटी MBBS की पढ़ाई कर रही है।कोर्ट ने आगे यह भी देखा कि यमिता अपने पति द्वारा खरीदे गए तीन बेडरूम वाले घर में रह रही हैं। इसमें कहा गया कि वह अच्छी तरह से क्वालिफाइड हैं, उनके पास फाइनेंस में MBA की डिग्री है और वह खुद कमाने में सक्षम हैं। कोर्ट ने कहा, "वह फाइनेंस में MBA ग्रेजुएट हैं और बहुत ज़्यादा क्वालिफाइड और पढ़ी-लिखी महिला हैं, जो खुद कमाने में पूरी तरह सक्षम हैं।"

कोर्ट ने यह भी गौर किया कि यमिता को किराए से हर महीने 10,450 रुपये और फिक्स्ड डिपॉजिट से ब्याज के तौर पर हर महीने 4,400 रुपये मिल रहे थे। कोर्ट ने आगे कहा कि फैमिली कोर्ट द्वारा अंतरिम गुजारा-भत्ता (interim maintenance) देने का आदेश देने से पहले ही आशुतोष उन्हें अपनी मर्ज़ी से हर महीने 20,000 रुपये दे रहे थे।

कोर्ट ने कहा, "प्रतिवादी (respondent) को किराए से हर महीने 10,450 रुपये की आय हो रही है और उन्हें अपनी FD से हर महीने 4,400 रुपये का ब्याज भी मिल रहा है और... याचिकाकर्ता (petitioner) अंतरिम गुजारा-भत्ता मिलने से पहले ही अपनी मर्ज़ी से हर महीने 20,000 रुपये का गुजारा-भत्ता दे रहे थे।"

कोर्ट ने रजनेश बनाम नेहा मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का ज़िक्र किया, जिनके तहत गुजारा-भत्ता तय करते समय कोर्ट को दोनों पक्षों की आय और संपत्ति, पति को कितने लोगों का खर्च उठाना है, उसकी देनदारियां और भुगतान करने की क्षमता जैसे कारकों पर विचार करना होता है। हाई कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने इन कारकों पर विचार तो किया था, लेकिन 30,000 रुपये प्रति माह का गुजारा-भत्ता तय करते समय उन्हें पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

कोर्ट ने कहा, "हालांकि यह कोर्ट इस बात से वाकिफ है कि याचिकाकर्ता एक संपन्न व्यक्ति हैं, फिर भी अंतरिम गुजारा-भत्ता देते समय कोर्ट उन सभी कारकों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता जिन पर विचार किया जाना चाहिए, खासकर इसलिए क्योंकि आवेदक और गैर-आवेदक के अधिकारों और देनदारियों के बीच संतुलन बनाना ज़रूरी है।" इसलिए कोर्ट ने अंतरिम गुजारा-भत्ते को 30,000 रुपये से घटाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया, जो 12 अप्रैल 2021 से लागू होगा - इसी तारीख को यमिता ने गुजारा-भत्ते के लिए अर्ज़ी दाखिल की थी।


 

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