न्याय में देरी की बड़ी तस्वीर: SC में 10 साल पुराने 10,000 से ज्यादा मामले लंबित, HC में 30 साल पुराने 80,000 केस अटके

Edited By Updated: 03 Aug, 2026 08:00 AM

10 000 cases pending in the supreme court for 10 years 80 000 cases stuck

2011 से अब तक न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और न्याय व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए 9,800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद दशकों से लंबित मामलों के निपटारे की रफ्तार में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा है।...

 नई दिल्ली: 2011 से अब तक न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और न्याय व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए 9,800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद दशकों से लंबित मामलों के निपटारे की रफ्तार में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा है। सुप्रीम कोर्ट में 10,000 से अधिक मामले ऐसे हैं जो 10 साल से ज्यादा समय से लंबित हैं। इनमें 558 मामले 20 साल से अधिक पुराने हैं, जबकि 26 मामले तीन दशक से भी ज्यादा समय से लंबित हैं। वहीं, देश के 25 हाई कोर्ट में 80,000 से अधिक मामले 30 सालों से अधिक समय से लंबित पड़े हैं।

पिछले हफ़्ते संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मामलों के निपटारे की जिम्मेदारी न्यायपालिका पर डाली, जिसने इनके निपटारे के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की है। उन्होंने आगे कहा, "कोर्ट में मामलों का समय पर निपटारा कई बातों पर निर्भर करता है, जिनमें शामिल हैं - जजों और न्यायिक अधिकारियों, कोर्ट के सहयोगी स्टाफ़ और भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर की पर्याप्त उपलब्धता, तथ्यों की जटिलता; सबूतों की प्रकृति, स्टेकहोल्डर्स (जैसे बार, जांच एजेंसियां, गवाह, मुकदमेबाज) का सहयोग और नियमों व प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन।"

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने खाली पदों पर जजों की नियुक्ति में तेजी दिखाई है, लेकिन 25 हाई कोर्ट और निचली अदालतों में स्थिति वैसी नहीं है। अभी हाई कोर्ट में जजों के मंज़ूर पदों की संख्या 1,122 है, जिनमें से 341 पद खाली हैं। निचली अदालतों में जजों के मंजूर पदों की संख्या 30,868 है, जिनमें से 7,311 पद खाली हैं। कानून मंत्री ने हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए सिफारिश शुरू करने के तय समय का पालन न करने के लिए संबंधित हाई कोर्ट कॉलेजियम को ज़िम्मेदार ठहराया, जो बड़ी संख्या में खाली पदों का मुख्य कारण है। हाई कोर्ट कॉलेजियम में हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और दो सबसे सीनियर जज शामिल होते हैं। सुप्रीम कोर्ट के लिए, जजों की नियुक्ति की सिफारिश भारत के चीफ जस्टिस करते हैं।

मेघवाल ने कहा, "5 साल से ज़्यादा समय से लंबित मामलों को निपटाने के लिए सभी 25 हाई कोर्ट और ज़िला अदालतों में 'एरियर कमेटियां' (बक़ाया मामलों की समितियां) बनाई गई हैं। सरकार ने लंबित मामलों को कम करने के मक़सद से नए क्रिमिनल लॉज 2023, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (संशोधन) एक्ट, 2018, कमर्शियल कोर्ट्स (संशोधन) एक्ट, 2018 और स्पेसिफिक रिलीफ (संशोधन) एक्ट, 2018 भी लागू किए हैं।"

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