कौन हैं NCERT के डायरेक्टर प्रोफेसर डीपी सकलानी? जानें उनके पास कौन-सी डिग्री और कैसा रहा उनका शैक्षणिक सफर

Edited By Updated: 26 Feb, 2026 05:12 PM

dinesh prasad saklani qualification

देश की स्कूली शिक्षा से जुड़ी नीतियों और पाठ्यक्रम को तय करने वाली संस्था National Council of Educational Research and Training (एनसीईआरटी) के डायरेक्टर प्रोफेसर डीपी सकलानी इन दिनों चर्चा में हैं।

नेशनल डेस्क: देश की स्कूली शिक्षा से जुड़ी नीतियों और पाठ्यक्रम को तय करने वाली संस्था National Council of Educational Research and Training (एनसीईआरटी) के डायरेक्टर प्रोफेसर डीपी सकलानी इन दिनों चर्चा में हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि आखिर वे कौन हैं और उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या है।

प्रोफेसर डीपी सकलानी का पूरा नाम Dinesh Prasad Saklani है। वे वर्ष 2022 से एनसीईआरटी के निदेशक पद पर कार्य कर रहे हैं। उनका जन्म 1 जनवरी 1963 को उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हुआ था। इतिहास उनके अध्ययन और शोध का मुख्य विषय रहा है और इसी क्षेत्र में उन्होंने लंबे समय तक अध्यापन किया है।

उन्होंने वर्ष 1996 में इतिहास विषय में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। उनकी उच्च शिक्षा Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal University से हुई, जहां से उन्होंने शोध कार्य पूरा किया। अकादमिक क्षेत्र में उनका अनुभव काफी व्यापक रहा है। एनसीईआरटी से पहले वे इसी विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे और विद्यार्थियों को पढ़ाते रहे।

अपने शिक्षण करियर के दौरान उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को भी मार्गदर्शन दिया और विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों से जुड़े रहे। वे शिमला स्थित Indian Institute of Advanced Study में विजिटिंग फेलो भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने शोध कार्य में योगदान दिया।

प्रोफेसर सकलानी ने इतिहास से जुड़े कई विषयों पर लेखन और शोध किया है। उनकी रुचि विशेष रूप से मध्य हिमालय के सामाजिक इतिहास, प्राचीन और मध्यकालीन भारत के शहरी विकास और सांस्कृतिक परंपराओं में रही है। विभिन्न अकादमिक मंचों पर उनके शोध कार्य को सराहा गया है और उन्हें साहित्यिक व शैक्षणिक सम्मान भी मिल चुके हैं।

वर्तमान में एनसीईआरटी के डायरेक्टर के रूप में वे स्कूल पाठ्यक्रम, किताबों के संशोधन और नई शिक्षा नीति से जुड़े कार्यों की देखरेख कर रहे हैं। शिक्षा जगत में उनकी भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि एनसीईआरटी की किताबें देशभर के लाखों छात्रों के लिए आधार सामग्री का काम करती हैं।

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