Trump के सलाहकारों का ‘वॉर प्लान’: ईरान पर पहले इजरायल हमला करे, फिर अमेरिका आ जाएगा साथ !

Edited By Updated: 26 Feb, 2026 03:22 PM

trump advisors prefer israel strike iran before us to boost support for military

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच रिपोर्ट में दावा है कि Donald Trump के कुछ सलाहकार चाहते हैं कि Israel पहले ईरान पर हमला करे, फिर अमेरिका समर्थन दे। Marco Rubio और JD Vance ने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर कड़ा रुख दिखाया।

Washington: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच रिपोर्ट में दावा है कि डोनाल्ड ट्रंप( Donald Trump) के कुछ सलाहकार चाहते हैं कि Israel पहले ईरान पर हमला करे, फिर अमेरिका समर्थन दे। मार्क रूबियो (Marco Rubio) और JD Vance जे.डी. वेंस ने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर कड़ा रुख दिखाया। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के भीतर कुछ सलाहकार मानते हैं कि अगर Israel पहले और अकेले ईरान पर हमला करे और जवाबी कार्रवाई में अमेरिका को निशाना बनाया जाए, तो अमेरिकी जनता सैन्य कार्रवाई के समर्थन में एकजुट हो सकती है। सूत्रों का दावा है कि अमेरिका और इजरायल संयुक्त सैन्य अभियान भी चला सकते हैं। हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक हमले की घोषणा नहीं हुई है।

 

अरब सागर में अमेरिकी नौसेना की उन्नत हथियारों के साथ तैनाती ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। इस बीच, परमाणु समझौते को लेकर अमेरिका और Iran के बीच दो दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने आरोप लगाया कि ईरान इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की वार्ता में मिसाइल कार्यक्रम भी केंद्रीय मुद्दा होगा। वहीं, उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

 

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि बड़े पैमाने पर हमला या “रेजीम चेंज” जैसी कार्रवाई हुई, तो ईरान पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी संपत्तियां इजरायल की तरह आयरन डोम जैसी सुरक्षा प्रणाली के तहत नहीं हैं, जिससे अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर संभावित जेनेवा वार्ता में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, प्रशासन का आधिकारिक रुख अभी भी कूटनीतिक समाधान पर जोर देता है लेकिन “अन्य विकल्प” खुले रखने की बात भी कही गई है।
 

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