Edited By Radhika,Updated: 26 Feb, 2026 04:50 PM

NCERT Controversy पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना बयान दिया है। उन्होंने इस पूरे मामले पर दुख प्रकट करते हुए साफ किया है कहा कि सरकार न्यायपालिका की गरिमा को सर्वोच्च मानती है। मंत्री का यह बयान NCERT की आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक...
NCERT Controversy: NCERT Controversy पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना बयान दिया है। उन्होंने इस पूरे मामले पर दुख प्रकट करते हुए साफ किया है कहा कि सरकार न्यायपालिका की गरिमा को सर्वोच्च मानती है। मंत्री का यह बयान NCERT की आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' से संबंधित विवादास्पद सामग्री को लेकर छिड़े विवाद पर आया है।
दोषियों पर कार्रवाई का शिक्षा मंत्री ने दिया आश्वासन
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहाकि इस तरह की पाठ्य सामग्री पब्लिश करना दुखद है और न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने का कोई भी सरकारी इरादा नहीं था। उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि जिस टीम या व्यक्तियों ने इस विवादित चैप्टर को तैयार किया है, उनकी पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा न्यायालय का भी पूरा सम्मान किया जाएगा। सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन भी किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनाया कड़ा रुख
पहले इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस कदम को न्यायपालिका पर पहली गोली चलाने जैसा बताया। अदालत ने चिंता व्यक्त की कि यदि स्कूली बच्चों को यह सिखाया जाएगा कि न्याय व्यवस्था भ्रष्ट है, तो भविष्य में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास पूरी तरह खत्म हो जाएगा। पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि किताबें पहले ही बाजार और सोशल मीडिया पर फैल चुकी हैं, ऐसे में उन्हें वापस लेने का कदम कितना प्रभावी होगा।
NCRT ने दी सफाई और माफी मांगी
विवाद के केंद्र में रही संस्था एनसीईआरटी ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। परिषद ने माफी मांगते हुए कहा कि इस विवादास्पद सामग्री को शामिल करना जानबूझकर किया गया काम नहीं था। यह अनजाने में हुआ है। परिषद का लक्ष्य छात्रों को लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जागरूक करना था, न कि किसी संस्था की छवि को धूमिल करना।वर्तमान में एनसीईआरटी ने विवादित अंशों को हटाने और पाठ्यपुस्तकों को संशोधित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।