Edited By Anu Malhotra,Updated: 03 Feb, 2026 08:47 AM

इंग्लैंड के क्रिकेट गलियारों से एक बेहद दुखद खबर आई है। क्रिकेट के दिग्गज और पूर्व इंग्लिश क्रिकेटर टोनी पिगॉट ने 67 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह दिया है। टोनी पिगॉट का जाना केवल एक खिलाड़ी का जाना नहीं, बल्कि इंग्लिश काउंटी क्रिकेट के एक ऐसे...
नेशनल डेस्क: इंग्लैंड के क्रिकेट गलियारों से एक बेहद दुखद खबर आई है। क्रिकेट के दिग्गज और पूर्व इंग्लिश क्रिकेटर टोनी पिगॉट ने 67 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह दिया है। टोनी पिगॉट का जाना केवल एक खिलाड़ी का जाना नहीं, बल्कि इंग्लिश काउंटी क्रिकेट के एक ऐसे अध्याय का अंत है जिसने मैदान से लेकर प्रशासन तक अपनी अमिट छाप छोड़ी।
शादी से बड़ा 'देश का बुलावा'
टोनी पिगॉट का अंतरराष्ट्रीय करियर आंकड़ों से कहीं ज्यादा उनकी प्रतिबद्धता के लिए याद किया जाएगा। 1983-84 के दौर में जब वह न्यूजीलैंड में क्लब क्रिकेट खेल रहे थे, तब इंग्लैंड की मुख्य टीम चोटिल खिलाड़ियों से जूझ रही थी। टोनी को आनन-फानन में टीम में शामिल किया गया। दिलचस्प और भावुक बात यह है कि जिस समय उन्हें अपना एकमात्र टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला, उसी दौरान उनकी शादी तय थी। उन्होंने देश के लिए खेलने के जुनून में अपनी शादी की तारीख आगे बढ़ा दी।
डेब्यू पर हैट्रिक और ससेक्स का कायाकल्प
टोनी ने महज 20 साल की उम्र में ससेक्स के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा और अपने पहले ही विकेट को हैट्रिक में बदलकर इतिहास रच दिया। हालांकि, पीठ की गंभीर चोट ने 1996 में उनके खेल करियर पर ब्रेक लगा दिया, लेकिन क्रिकेट के प्रति उनका प्रेम कम नहीं हुआ। संन्यास के बाद उन्होंने ससेक्स के चीफ एग्जीक्यूटिव (CEO) की जिम्मेदारी संभाली। उनके नेतृत्व में ही ससेक्स स्थायी फ्लडलाइट्स लगाने वाला पहला क्लब बना और 2003 में अपनी पहली काउंटी चैंपियनशिप जीतकर इतिहास रचा।
क्रिकेट जगत में शोक: एक मार्गदर्शक की विदाई
ससेक्स के पूर्व कप्तान क्रिस एडम्स ने उन्हें याद करते हुए कहा कि टोनी क्लब के इतिहास में बदलाव लाने वाले सबसे बड़े व्यक्तित्व थे। उन्होंने न केवल ससेक्स को नई ऊंचाइयां दीं, बल्कि कई खिलाड़ियों के करियर को सही दिशा दिखाने में बड़े भाई और कोच की भूमिका निभाई। अपने जीवन के आखिरी वर्षों में भी वह पिच इंस्पेक्टर और मैच रेफरी के रूप में खेल से जुड़े रहे। खराब स्वास्थ्य के बावजूद, नवंबर 2025 में उन्होंने अपनी आत्मकथा 'Lester and the Deckchair Revolution' प्रकाशित की, जो क्रिकेट के प्रति उनके अटूट समर्पण का प्रमाण है।