Edited By Rohini Oberoi,Updated: 01 Jun, 2026 10:13 AM

कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं जो अचानक तेज लक्षणों के साथ सामने आती हैं इसलिए लोग उन्हें जल्दी पहचान लेते हैं लेकिन कुछ बीमारियां चुपचाप शरीर में अपनी जगह बना लेती हैं। 'मल्टीपल स्केलेरोसिस' (Multiple Sclerosis - MS) एक ऐसी ही छिपी हुई और गंभीर बीमारी...
Multiple Sclerosis Symptoms : कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं जो अचानक तेज लक्षणों के साथ सामने आती हैं इसलिए लोग उन्हें जल्दी पहचान लेते हैं लेकिन कुछ बीमारियां चुपचाप शरीर में अपनी जगह बना लेती हैं। 'मल्टीपल स्केलेरोसिस' (Multiple Sclerosis - MS) एक ऐसी ही छिपी हुई और गंभीर बीमारी है जिसके शुरुआती संकेत इतने सामान्य लगते हैं कि लोग अक्सर उन्हें काम का तनाव, कमजोरी या पोषण की कमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि भारत में सही बीमारी का पता चलने से पहले मरीज सालों तक भटकते रहते हैं।
जानें क्या है मल्टीपल स्केलेरोसिस?
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार मल्टीपल स्केलेरोसिस एक 'ऑटोइम्यून' (Autoimmune) बीमारी है। इसमें हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity System) गलती से हमारी ही नसों की सुरक्षा करने वाली परत (Myelin Sheath) पर हमला करने लगती है। इससे दिमाग (Brain) और शरीर के बाकी अंगों के बीच संदेश पहुंचने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है।

बता दें कि इस बीमारी के लक्षण हर मरीज में अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन ये 5 शुरुआती संकेत सबसे आम हैं:
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हाथ-पैरों में झनझनाहट: नसों में गड़बड़ी के कारण अंगों में चींटी चलने जैसा महसूस होना या सुन्न (Numbness) हो जाना।
धुंधला दिखाई देना: कुछ दिनों तक आंखों के आगे अचानक धुंधलापन छा जाना।

अचानक चक्कर आना: चलते-चलते या बैठे-बैठे अचानक संतुलन बिगड़ना और चक्कर आना।
लगातार थकान: भरपूर आराम करने के बाद भी शरीर में हमेशा अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होना।

मांसपेशियों में जकड़न: शरीर के अंगों और मांसपेशियों में बेवजह कड़ापन आना।
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20 से 40 की उम्र वाले युवा-महिलाओं पर खतरा ज्यादा
विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी सबसे ज्यादा 20 से 40 साल की उम्र के युवाओं को अपना शिकार बनाती है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इसके मामले कहीं अधिक देखे जाते हैं। विडंबना यह है कि इस उम्र में थकान, चक्कर या मूड स्विंग्स (मनोदशा में बदलाव) जैसी दिक्कतों को लोग ऑफिस के काम के दबाव या चिंता से जोड़कर टाल देते हैं जिससे सही इलाज मिलने में बहुत देरी हो जाती है।