Edited By Purnima Singh,Updated: 09 Jun, 2026 06:19 PM

राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के तहत गठित राष्ट्रीय स्तरीय नीति कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति की पहली बैठक मंगलवार को नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सहकारिता मंत्रालय के सचिव एवं समिति के अध्यक्ष डॉ. आशीष...
नेशनल डेस्क : राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के तहत गठित राष्ट्रीय स्तरीय नीति कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति की पहली बैठक मंगलवार को नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सहकारिता मंत्रालय के सचिव एवं समिति के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने की। बैठक में राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय मंत्रालयों, राष्ट्रीय सहकारी महासंघों और विभिन्न सहकारी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, डिजिटल परिवर्तन, क्षमता निर्माण, सदस्यता विस्तार और सहकारिता आधारित समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास पर विशेष जोर दिया गया।
डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "सहकार से समृद्धि" के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारी क्षेत्र को सशक्त और आधुनिक बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत, पारदर्शी और आधुनिक सहकारी संस्थाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करेंगी तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
बैठक में इफको के अध्यक्ष दिलीप संघानी, सहकारिता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ जैन, संयुक्त सचिव आनंद कुमार झा, रमन कुमार और शिव पाल सिंह, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के कुलपति, नाबार्ड के अध्यक्ष सहित विभिन्न मंत्रालयों, सहकारी संस्थाओं और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
छह रणनीतिक स्तंभों पर चर्चा
बैठक के दौरान राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के छह प्रमुख रणनीतिक स्तंभों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें सहकारी क्षेत्र की बुनियाद को मजबूत करना, सहकारी संस्थाओं को प्रतिस्पर्धी बनाना, उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना, समावेशिता और पहुंच बढ़ाना, नए क्षेत्रों में सहकारिता की भूमिका का विस्तार करना तथा युवाओं को सहकारिता आंदोलन से जोड़ना शामिल है।
कई मंत्रालयों के साथ समन्वित कार्ययोजना
समिति ने पंचायती राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, मत्स्य पालन विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग समेत विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वित कार्ययोजना पर भी चर्चा की।
प्रमुख पहलों की समीक्षा
बैठक में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को बहुउद्देश्यीय सेवा केंद्रों के रूप में विकसित करने, प्रत्येक जिले में मॉडल सहकारी गांव स्थापित करने, सभी पंचायतों तक सहकारिता की पहुंच सुनिश्चित करने, डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों के विस्तार, ईआरपी आधारित प्रबंधन प्रणाली को बढ़ावा देने तथा साइबर सुरक्षा को मजबूत करने जैसी पहलों की समीक्षा की गई।
इसके अलावा राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस, PACS के कंप्यूटरीकरण, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना तथा राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड जैसी संस्थाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई।
2035 तक 50 करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य
बैठक में सहकारी सदस्यता बढ़ाने, महिलाओं, युवाओं और छोटे किसानों की भागीदारी मजबूत करने तथा सहकारी संस्थाओं को नए बाजारों से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के तहत वर्ष 2035 तक सहकारी सदस्यता को 50 करोड़ तक पहुंचाने और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सहकारी क्षेत्र के योगदान को तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
डिजिटल परिवर्तन और युवा नेतृत्व पर जोर
समिति ने सहकारी क्षेत्र में नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति, कौशल विकास और युवा नेतृत्व निर्माण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस, सहकारी रैंकिंग फ्रेमवर्क, डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा की गई। बैठक के अंत में समिति ने कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 का सफल क्रियान्वयन केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सहकारी संस्थाओं और अन्य सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी और समन्वित प्रयासों से सुनिश्चित किया जाएगा।