भारत में गोरेपन का क्रेज, पर विदेशों में सांवला दिखने के लिए लोग बहा रहे लाखों रुपए... जानिए क्या है ये अजीबोगरीब ट्रेंड

Edited By Updated: 29 May, 2026 02:44 PM

forget the craze for fair skin foreigners are spending lakhs to look dark

हमारे देश भारत में आज भी एक बड़ा तबका गोरा दिखने की होड़ में शामिल है। फेयरनेस क्रीम के विज्ञापनों से लेकर महंगे कॉस्मेटिक और लेजर ट्रीटमेंट तक, लोग अपना रंग साफ करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सात समंदर पार दुनिया...

नेशनल डेस्क: हमारे देश भारत में आज भी एक बड़ा तबका गोरा दिखने की होड़ में शामिल है। फेयरनेस क्रीम के विज्ञापनों से लेकर महंगे कॉस्मेटिक और लेजर ट्रीटमेंट तक, लोग अपना रंग साफ करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सात समंदर पार दुनिया के कुछ विकसित देशों में कहानी बिल्कुल इसके उलट है? जहां हम गोरा होने के लिए तड़प रहे हैं, वहीं अमेरिका और कई यूरोपीय देशों में लोग अपनी साफ-गोरी त्वचा को सांवला यानी टैन (Tan) करने के लिए हर महीने हजारों-लाखों रुपए फूंक रहे हैं। आइए समझते हैं कि आखिर सांवला दिखने का यह कैसा जुनून है, जिसके लिए लोग मोटी रकम खर्च करने को तैयार हैं।

सिर्फ फैशन नहीं, अमीरी की निशानी है सांवली त्वचा
दरअसल, अमेरिका और कई पश्चिमी देशों में स्किन टैनिंग अब सिर्फ कोई छोटा-मोटा ब्यूटी ट्रेंड नहीं रह गया है, बल्कि यह अरबों डॉलर का एक स्थापित कारोबार बन चुका है। वहां जैसे ही गर्मियों का मौसम आता है, लोग धूप सेकने (सनबाथ) के लिए बीच पर उमड़ पड़ते हैं। जो लोग धूप में नहीं जा पाते, वे टैनिंग सैलून का रुख करते हैं। कमाल की बात यह है कि इन देशों में सांवली या सुनहरी (ब्रॉन्ज) त्वचा को फिटनेस और लग्जरी लाइफस्टाइल से जोड़कर देखा जाता है। वहां माना जाता है कि अगर आपकी स्किन टैन है, तो इसका मतलब है कि आप काम के बोझ से दूर छुट्टियां मनाने, समुद्र किनारे वक्त बिताने और एक एक्टिव लाइफ जीने के लिए अमीर हैं। इसी अमीर और कूल दिखने की चाहत में लोग एक-एक टैनिंग सेशन के लिए 4 हजार से लेकर 17 हजार रुपए तक खुशी-खुशी दे देते हैं। कई लोग तो सालभर इस लुक को बनाए रखने के लिए लाखों रुपए एडवांस में सैलून को चुकाते हैं।

हॉलीवुड और किम कार्दशियन ने बनाया इसे स्टेटस सिंबल
हॉलीवुड, इंटरनेशनल फैशन इंडस्ट्री और सोशल मीडिया ने इस ब्रॉन्ज ग्लो को एक स्टेटस सिंबल बना दिया है। किम कार्दशियन, जेनिफर लोपेज और बियॉन्से जैसी ग्लोबल सेलिब्रिटीज इस लुक की आइकॉन हैं। इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर टैन स्किन वाली तस्वीरों को लाखों-करोड़ों लाइक्स मिलते हैं, जिससे युवाओं के बीच सांवला दिखने का क्रेज और तेजी से बढ़ रहा है। जहां भारत में गोरे रंग को सामाजिक स्वीकृति और खूबसूरती का पैमाना माना जाता है, वहीं इन देशों में टैन लुक को प्रीमियम ब्यूटी स्टैंडर्ड का दर्जा हासिल है।

खूबसूरती की चाहत में कैंसर का खतरा
हालांकि, सांवला दिखने का यह अंधा क्रेज सेहत के लिहाज से बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। हेल्थ एक्सपर्ट्स और स्किन स्पेशलिस्ट लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि कृत्रिम रूप से या जरूरत से ज्यादा टैनिंग करना त्वचा को बुरी तरह डैमेज करता है। टैनिंग सैलून में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और यूवी रेज (UV Rays) लंबे समय में स्किन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ा देती हैं। इसके बावजूद, लोग डॉक्टरों की चेतावनी को नजरअंदाज कर सैलून के बाहर कतारों में खड़े नजर आते हैं।

खूबसूरती का कोई फिक्स पैमाना नहीं
यह पूरा ट्रेंड यह साफ करता है कि खूबसूरती की कोई एक परिभाषा नहीं होती। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस समाज और कल्चर में रह रहे हैं। एक तरफ जहां भारतीय समाज गोरेपन के पीछे भाग रहा है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी दुनिया सांवलेपन को खरीदने के लिए लाखों रुपए लुटा रही है। अंततः, यह सब केवल मानसिकता और बाजार के बनाए गए पैमानों का खेल है।

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