कोलंबो से कश्मीर तक आतंक की एक ही कहानी, पहलगाम और ईस्टर हमला एक ही “टेरर नेटवर्क” का खेल !

Edited By Updated: 22 Apr, 2026 03:08 PM

from colombo to kashmir the shared scars of a global terror factory

श्रीलंका के ईस्टर हमले और कश्मीर के पहलगाम हमले को जोड़ते हुए लेख में आतंकवाद की वैश्विक जड़ पर सवाल उठाया गया है। इसमें पाकिस्तान-आधारित संगठनों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं और क्षेत्रीय व वैश्विक सुरक्षा के लिए इसे बड़ा खतरा बताया गया है।

International Desk:श्रीलंका और भारत की दो बड़ी आतंकी घटनाओं को जोड़ते हुए एक विश्लेषण सामने आया है, जिसमें दावा किया गया है कि वैश्विक आतंकवाद की जड़ एक ही नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है। विश्लेषण रिपोर्ट  में 2019 में Sri Lanka Easter Bombings का जिक्र किया गया है, जिसमें 269 लोगों की जान गई थी। इस हमले ने चर्च और होटलों जैसे सुरक्षित स्थानों को भी निशाना बनाया था। इसी तरह 22 अप्रैल 2025 को Pahalgam (कश्मीर) में हुआ हमला भी बेहद क्रूर था। रिपोर्ट के अनुसार, आतंकियों ने 26 लोगों को धर्म के आधार पर अलग करके गोली मार दी। रिपोर्ट   में श्रीलंका और कश्मीर की दो बड़ी आतंकी घटनाओं को जोड़कर  एक जैसी सोच और रणनीति का हिस्सा बताया गया है।

 

श्रीलंका में ईस्टर के दिन चर्च और होटलों में हुआ हमला सिर्फ लोगों को मारने के लिए नहीं था, बल्कि देश की शांति और पर्यटन को बड़ा नुकसान पहुंचाने के मकसद से किया गया था। इसी तरह, कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी। रिपोर्ट के अनुसार, हमलावरों ने पहले लोगों से उनका धर्म पूछा और फिर उन्हें गोली मार दी। इस हमले को The Resistance Front (TRF) से जोड़ा गया, जिसे लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) का सहयोगी माना जाता है।  लेख में कहा गया है कि ऐसे हमलों का मकसद सिर्फ डर फैलाना नहीं होता, बल्कि उस इलाके की स्थिरता और आर्थिक विकास को रोकना भी होता है।

 

श्रीलंका और कश्मीर दोनों ही जगहों पर पर्यटन तेजी से बढ़ रहा था, और इन हमलों ने उसी को निशाना बनाया।  इसके अलावा,  रिपोर्ट  में  में दावा किया गया है कि Pakistan में सक्रिय कुछ आतंकी नेटवर्क का असर दुनिया के कई हिस्सों तक फैल रहा है। Global Terrorism Index 2026 का हवाला देते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान आतंकवाद से प्रभावित देशों में शामिल है।  रिपोर्ट  में  यह भी बताया है कि आतंकवाद के तरीके अब बदल रहे हैं। अब फंडिंग के लिए डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे इन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।

 

साथ ही, जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) और लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) जैसे संगठनों द्वारा नए-नए ट्रेनिंग और नेटवर्क बनाए जा रहे हैं।  विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंका और कश्मीर की घटनाएं अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि एक ही तरह की आतंकी सोच और नेटवर्क से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए इनसे निपटने के लिए देशों को मिलकर सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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