Edited By Mehak,Updated: 04 Apr, 2026 05:12 PM

जब कोई व्यक्ति इस दुनिया से चला जाता है, तो उसकी यादें और चीजें रह जाती हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत व्यक्ति के कपड़े, गहने, जूते-चप्पल या बर्तन इस्तेमाल करना उचित नहीं माना गया है, क्योंकि इनमें उसकी ऊर्जा और स्पर्श मौजूद रहती है। इसे इस्तेमाल...
नेशनल डेस्क : जब कोई प्रियजन इस दुनिया से चला जाता है, तो उसकी यादें हमारे साथ रहती हैं। ऐसे समय में लोग अक्सर उनके कपड़े, गहने या अन्य सामान इस्तेमाल करने लगते हैं। लेकिन हिंदू धर्मग्रंथ गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद ऐसी चीज़ों का उपयोग सावधानी से करना चाहिए। आइए जानते हैं इस पर शास्त्र क्या कहते हैं और क्यों ये नियम बनाए गए हैं।
मृत्यु और आत्मा की यात्रा
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा एक नई यात्रा पर निकलती है। इस समय आत्मा अपने जीवन और संबंधों से जुड़ी चीज़ों के प्रति मोह में रहती है। यदि हम लगातार मृतक की चीज़ों का इस्तेमाल करते हैं, तो उसकी आत्मा का यह मोह खत्म होने में समय लग सकता है और शांति मिलने में बाधा आ सकती है।
मृत व्यक्ति के कपड़ों का इस्तेमाल
कपड़े केवल पहनने के लिए नहीं होते, बल्कि उनमें भावनात्मक ऊर्जा और व्यक्ति का प्रभाव भी होता है। मृतक के कपड़े पहनने से मानसिक असहजता या बेचैनी पैदा हो सकती है। इसलिए सलाह दी जाती है कि कपड़ों पर गंगा जल छिड़क कर जरूरतमंदों को दान कर दें। इससे आत्मा को शांति और अगले जीवन की ओर बढ़ने में मदद मिलती है।
गहनों और आभूषणों के नियम
गहने शरीर के संपर्क में रहते हैं और उनमें व्यक्ति की ऊर्जा जुड़ी रहती है। मृत व्यक्ति के गहनों को पहनना उचित नहीं माना गया है। हालांकि, अगर जीवनकाल में कोई गहने उपहार में दे चुका हो, तो उन्हें पहनना गलत नहीं है। अधिकांश मामलों में गहनों को याद के रूप में संभालकर रखना ही बेहतर माना जाता है।
घड़ी, जूते-चप्पल और बर्तनों का महत्व
- घड़ी : जीवन और समय से जुड़ी मानी जाती है, मृतक की घड़ी पहनने से जीवन में बाधा आ सकती है।
- जूते-चप्पल : पृथ्वी तत्व से जुड़े होते हैं और इनका पहनना नकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकता है।
- बर्तन : इनमें भोजन और जीवन से जुड़ी सूक्ष्म ऊर्जा होती है, जो घर के वातावरण पर असर डाल सकती है।
बिस्तर बदलना क्यों जरूरी है
मृतक का बिस्तर भी बदल देना चाहिए। नया बिस्तर उपयोग करने से आत्मा को शांति मिलती है और वह अगले जीवन की ओर आसानी से बढ़ पाती है।
पितृ दोष और धार्मिक मान्यताएं
गरुड़ पुराण में यह भी कहा गया है कि नियमों का पालन न करने पर पितृ दोष लग सकता है। इससे जीवन में मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। यह मान्यता धार्मिक विश्वासों पर आधारित है, लेकिन इसका उद्देश्य मानसिक शांति और परंपरा का सम्मान करना भी है।
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण
इन मान्यताओं का एक व्यावहारिक पक्ष भी है। जब हम मृतक की चीज़ों का बार-बार इस्तेमाल करते हैं, तो हम उनके दुःख और यादों में फंस जाते हैं। इससे मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है। नियमों का पालन करने से भावनात्मक रूप से आगे बढ़ने और जीवन में नई शुरुआत करने में मदद मिलती है।