Citizenship Rules 2026: केंद्र सरकार ने नागरिकता और इमिग्रेशन से जुड़े नियमों में किए बड़े बदलाव

Edited By Updated: 19 May, 2026 12:45 PM

citizenship rules 2026 indian passport surrender oci card immigration rules

Indian Citizenship Rules 2026: गृह मंत्रालय (MHA) ने एक अधिसूचना जारी कर नागरिकता नियम, 2009 में संशोधनों की घोषणा की है, जिसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के आवेदकों के लिए पासपोर्ट संबंधी जानकारी देने से जुड़े नए प्रावधान लागू किए गए...

Indian Citizenship Rules 2026: गृह मंत्रालय (MHA) ने एक अधिसूचना जारी कर नागरिकता नियम, 2009 में संशोधनों की घोषणा की है, जिसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के आवेदकों के लिए पासपोर्ट संबंधी जानकारी देने से जुड़े नए प्रावधान लागू किए गए हैं। सोमवार देर रात जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि संशोधित नियम-जिन्हें 'नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026' नाम दिया गया है-आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के तुरंत बाद ही प्रभावी हो गए हैं।

नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 18 के तहत नए Citizenship (Amendment) Rules 2026 लागू किए गए हैं। इसके साथ ही 2009 के नियमों की अनुसूची IC में नया प्रावधान जोड़ा गया है, जिससे नागरिकता प्रक्रिया और ज्यादा सख्त और डिजिटल हो गई है।

पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी अब जरूरी
इन बदलावों के तहत, "नागरिकता नियमों की 'अनुसूची IC' में एक नया क्लॉज़ जोड़ा गया है, जिसके अनुसार आवेदकों को यह बताना होगा कि क्या उनके पास पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश की सरकारों द्वारा जारी किया गया कोई वैध या समाप्त हो चुका पासपोर्ट है।"

पूरी पासपोर्ट डिटेल देनी होगी अनिवार्य
आवेदकों को अब पासपोर्ट से जुड़ी सभी जानकारी फॉर्म में देनी होगी, जैसे:
पासपोर्ट नंबर
जारी होने की तारीख
जारी करने का स्थान
समाप्ति (Expiry) की तारीख
यह जानकारी आवेदन प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा होगी और इसे छुपाया नहीं जा सकेगा।

संशोधित प्रावधान के तहत, "आवेदकों को या तो यह पुष्टि करनी होगी कि उनके पास ऐसा कोई पासपोर्ट नहीं है, या यदि उनके पास है, तो उन्हें विस्तृत जानकारी देनी होगी, जिसमें पासपोर्ट नंबर, जारी होने की तारीख और स्थान, और समाप्त होने की तारीख शामिल है।"

इसके अलावा, "जिन व्यक्तियों ने ऐसे पासपोर्ट होने की घोषणा की है, उन्हें अपनी नागरिकता के आवेदन की मंजूरी के 15 दिनों के भीतर संबंधित डाक अधिकारियों को वे पासपोर्ट सौंपने का वचन देना होगा।" अधिकारियों ने बताया कि इस संशोधन का उद्देश्य इन देशों से आने वाले व्यक्तियों के नागरिकता आवेदनों में दस्तावेज़ीकरण को सुव्यवस्थित करना और प्रक्रियात्मक स्पष्टता को मज़बूत करना है।

मूल नागरिकता नियम सबसे पहले 25 फरवरी, 2009 को अधिसूचित किए गए थे और आखिरी बार 11 मार्च, 2024 को संशोधित किए गए थे। संसद ने दिसंबर 2019 में नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित किया था, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि यह हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित उन व्यक्तियों को आशा की एक नई किरण देगा, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धर्म के आधार पर उत्पीड़न का सामना करने के बाद भारत आए हैं।

अमित शाह ने तब दोहराया था कि यह विधेयक भारत में किसी भी अल्पसंख्यक के खिलाफ नहीं है और प्रत्येक भारतीय नागरिक के अधिकारों की समान रूप से रक्षा की जाएगी, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नरेंद्र मोदी सरकार देश के प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इसके बाद, शाह ने यह भी कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य उन लोगों को एक गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना था, जिन्होंने दशकों तक धार्मिक उत्पीड़न सहा था; उन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी, बशर्ते वे नागरिकता प्राप्त करने की शर्तों को पूरा करते हों।

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि नागरिकता भारत में प्रवेश करने की तारीख और वर्ष से ही मान्य होगी, और उनके खिलाफ चल रहे सभी मामले तथा कानूनी कार्यवाही समाप्त कर दी जाएगी; इसके अलावा, उनके व्यापार और वाणिज्यिक हितों की भी समान आधार पर रक्षा की जाएगी। शाह ने आगे कहा कि भले ही इन अल्पसंख्यकों के पासपोर्ट और वीज़ा समाप्त हो चुके हों, फिर भी उन्हें अवैध नहीं माना जाएगा। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे इस्लामी देशों में अल्पसंख्यकों की आबादी कम हो गई है। इन वर्षों में उनकी संख्या में काफ़ी कमी आई है, क्योंकि या तो उन्हें मार दिया गया या फिर उन्हें अपना धर्म बदलने के लिए मजबूर किया गया, और इस तरह उन्हें भारत भागने के लिए विवश होना पड़ा। उन्होंने कहा कि धार्मिक आधार पर भारत का विभाजन और उसके बाद पाकिस्तान तथा बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करने में 1950 के नेहरू-लियाकत समझौते की विफलता ही इस विधेयक को लाने के मुख्य कारण हैं।

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!