देश में गहराते चीनी संकट के बीच केंद्र सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला

Edited By Updated: 21 Aug, 2026 06:02 AM

govt took this major decision regarding the deepening sugar crisis in country

स्थानीय बाजारों में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने बृहस्पतिवार को 'शुल्क दर कोटा' के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के बिना शुल्क वाले आयात की मंजूरी दे दी। इस कदम का मकसद चीनी की घरेलू उपलब्धता बढ़ाना और इसकी कीमतों में बढ़ोतरी को...

नेशनल डेस्कः स्थानीय बाजारों में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने बृहस्पतिवार को 'शुल्क दर कोटा' के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के बिना शुल्क वाले आयात की मंजूरी दे दी। इस कदम का मकसद चीनी की घरेलू उपलब्धता बढ़ाना और इसकी कीमतों में बढ़ोतरी को रोकना है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा, ''कच्ची चीनी के लिए आयात नीति में बदलाव किया गया है ताकि शुल्क दर कोटा (टीआरक्यू) के तहत 31 अक्टूबर, 2026 तक 10 लाख टन बिना शुल्क वाले आयात की अनुमति दी जा सके।''

एक उद्योग निकाय के अनुसार, यह आदेश चीनी की कीमतों में तेजी से हुई वृद्धि के बीच आया है। वर्ष 2026-27 सत्र से पहले शुरुआती स्टॉक कम होने के कारण मिल-गेट कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। मंगलवार को पूरे देश में औसत मिल-गेट कीमत बढ़कर 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई, जो एक साल पहले 3,900 रुपये थी। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त तक खुदरा चीनी की कीमतें सालाना आधार पर लगभग 13 प्रतिशत बढ़कर 52.30 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं, जो एक साल पहले 46.34 रुपये किलो थीं।

आमतौर पर अगस्त और नवंबर के बीच चीनी की मांग बढ़ जाती है, क्योंकि इस दौरान देश में गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार मनाए जाते हैं। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने उन बड़े उपभोक्ताओं पर स्टॉक रखने की सीमा भी तय की है जो महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए स्टॉक की सीमा 15 दिन की खपत के बराबर तय की गई है। 

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!