AI से बड़ी कंपनियों में नौकरियां घटेंगी, छोटे कारोबार बढ़ाएंगे रोजगार: नीलेकणि

Edited By Updated: 06 Aug, 2026 05:10 PM

ai will reduce jobs in large companies while small businesses

इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने बृहस्पतिवार को कहा कि स्वचालन और कृत्रिम मेधा (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल से भारत की बड़ी एवं सुव्यवस्थित कंपनियों में आने वाले वर्षों में नौकरियां घट सकती हैं, जबकि लाखों छोटे कारोबार भविष्य में रोजगार सृजन

नई दिल्लीः इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने बृहस्पतिवार को कहा कि स्वचालन और कृत्रिम मेधा (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल से भारत की बड़ी एवं सुव्यवस्थित कंपनियों में आने वाले वर्षों में नौकरियां घट सकती हैं, जबकि लाखों छोटे कारोबार भविष्य में रोजगार सृजन का प्रमुख आधार बनेंगे। 'एनसीएईआर इंडिया पॉलिसी फोरम-2026' को संबोधित करते हुए नीलेकणि ने कहा कि रोजगार सृजन को लेकर देश की सोच में बुनियादी बदलाव की जरूरत है। 

नीलेकणि नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च (NCAER) के संचालन मंडल के चेयरमैन भी हैं। उन्होंने कहा, ''बड़ी कंपनियां, जो बहुत सुव्यवस्थित ढंग से काम करती हैं, नौकरियों में कटौती के लिहाज से सबसे अधिक प्रभावित होंगी। इसका कारण यह है कि वहां हर काम कुछ तय कार्यों तक सीमित होता है, जिन्हें स्वचालन के जरिये आसानी से किया जा सकता है। इसलिए आने वाले वर्षों में बड़ी कंपनियां शुद्ध रूप से रोजगार घटाने वाली बन सकती हैं।'' इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था का भविष्य लाखों छोटे कारोबार क्षेत्रों में है, क्योंकि वे एआई से होने वाले बदलावों के प्रति अपेक्षाकृत अधिक सक्षम हैं। 

नीलेकणि ने कहा, ''लाखों छोटे कारोबार में एआई के जरिये व्यापक स्तर पर बदलाव करना कहीं अधिक जटिल है। इसलिए उन पर नौकरियों में कटौती का असर अपेक्षाकृत कम होगा और वे अधिक रोजगार सृजित करेंगे।'' उन्होंने कहा कि भविष्य में अर्थव्यवस्था इस सोच पर आगे बढ़ेगी कि कुछ कंपनियां लाखों लोगों को रोजगार दें, इसके बजाय लाखों कंपनियां एक-एक व्यक्ति को रोजगार दें। नीलेकणि ने अनुमान जताया कि भारत में स्टार्टअप की संख्या 2035 तक बढ़कर 10 लाख हो सकती है, जबकि फिलहाल यह करीब 1.5 लाख है। 

उन्होंने कहा कि इस बदलाव को समर्थन देने के लिए बड़े पैमाने पर नियामकीय बोझ कम करने और कारोबार से जुड़े तंत्र को सरल बनाने की जरूरत है। छोटे उद्यमियों को अनावश्यक नियमों के बोझ से बचाने के साथ-साथ भारतीय रिजर्व बैंक के अकाउंट एग्रीगेटर और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) जैसे डिजिटल मंचों के माध्यम से उन्हें पूंजी और बाजार तक आसान पहुंच उपलब्ध कराई जानी चाहिए। नीलेकणि ने कहा कि रोजगार सृजन के तौर-तरीकों पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता है। 

उन्होंने कहा कि किसी कर्मचारी का एक ही कंपनी में 40 वर्ष तक काम करने की पारंपरिक अवधारणा अब अप्रासंगिक होती जा रही है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती गिग अर्थव्यवस्था और बार-बार नौकरी बदलने वाले कार्यबल को ध्यान में रखते हुए 'पोर्टेबल लाभ' और 'पोर्टेबल प्रमाण-पत्र' जैसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।  

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