Edited By jyoti choudhary,Updated: 06 Aug, 2026 12:51 PM

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC में 6.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 31,522 करोड़ रुपए जुटाए। यह देश के पूंजी बाजार के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ऑफर फॉर सेल (OFS) रहा। सरकार ने पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखते हुए अंजाम दिया,...
नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC में 6.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 31,522 करोड़ रुपए जुटाए। यह देश के पूंजी बाजार के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ऑफर फॉर सेल (OFS) रहा। सरकार ने पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखते हुए अंजाम दिया, जिससे बाजार को अंतिम समय तक इसकी भनक नहीं लगी।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने OFS की लॉन्च डेट को अंतिम समय तक गुप्त रखा ताकि ट्रेडर पहले से पोजीशन न बना सकें और शेयर की कीमत पर दबाव न पड़े। यही वजह रही कि सरकार शुरुआती योजना से कहीं अधिक हिस्सेदारी बेचने में सफल रही।
अंतिम समय तक रही गोपनीयता
सूत्रों के अनुसार, डील से जुड़े निवेश बैंकों को भी अलग-अलग समय पर जानकारी दी गई। एक बैंक को तो स्टॉक एक्सचेंज में सूचना जारी होने से कुछ समय पहले ही OFS की जानकारी मिली। डील पर काम करने वाली कोर टीम के अलावा बाकी सलाहकारों को बाजार बंद होने के बाद ही शामिल किया गया।
बिना फीस के काम करने को तैयार हुए बैंक
इस OFS की एक खास बात यह भी रही कि डील से जुड़े किसी भी निवेश बैंक ने एडवाइजरी फीस नहीं ली। एक बैंक के मुफ्त में काम करने की पेशकश के बाद बाकी बैंकों ने भी फीस छोड़ने का फैसला किया। सरकारी विनिवेश से जुड़ी डील में अक्सर निवेश बैंक बेहद कम या नाममात्र शुल्क लेते हैं।
सही समय पर लॉन्च हुआ OFS
बाजार को उम्मीद थी कि सरकार LIC के तिमाही नतीजों के बाद हिस्सेदारी बेचेगी, लेकिन सरकार ने उससे पहले ही OFS लॉन्च कर दिया। अधिकारियों का मानना था कि इससे शेयर की कीमत स्थिर रखने और निवेशकों की रुचि बनाए रखने में मदद मिली।
रणनीति ने दिलाई सफलता
सरकार ने शुरुआत में 2.5% हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव रखा और अधिक मांग की स्थिति में 4% अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने के लिए ग्रीन शू विकल्प रखा। यह रणनीति सफल रही। संस्थागत निवेशकों ने शुरुआती हिस्से को 3.32 गुना सब्सक्राइब किया, जिसके बाद सरकार ने अतिरिक्त शेयर भी जारी कर दिए।