Edited By Parveen Kumar,Updated: 23 Jan, 2026 06:49 PM

पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में आई कड़वाहट अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर भी दिखने लगा है। गुजरात के राजकोट का एक परिवार इसकी सबसे दर्दनाक मिसाल बन गया है, जहां पति और बच्चे भारत...
नेशनल डेस्क: पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में आई कड़वाहट अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर भी दिखने लगा है। गुजरात के राजकोट का एक परिवार इसकी सबसे दर्दनाक मिसाल बन गया है, जहां पति और बच्चे भारत में हैं, जबकि पत्नी बीते तीन साल से पाकिस्तान के कराची में फंसी हुई है। वीजा की जटिल प्रक्रिया और दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव ने इस परिवार को जबरन अलग रहने पर मजबूर कर दिया है।
राजकोट निवासी परवेज शेख पेशे से एसी मैकेनिक हैं। उनकी शादी वर्ष 2015 में रेहाना से हुई थी, जो मूल रूप से कराची की रहने वाली हैं। रेहाना का परिवार पाकिस्तान से राजकोट आया था और यहीं दोनों का निकाह हुआ। शादी के बाद रेहाना ने नियमों के तहत वीजा और अन्य औपचारिकताएं पूरी कीं और पति के साथ भारत में रहने लगीं।
शुरुआती वर्षों में सब कुछ सामान्य रहा। रेहाना का वीजा समय-समय पर बढ़ता रहा और इसी दौरान दंपती के दो बच्चे भी हुए। परिवार राजकोट में सुकून की जिंदगी जी रहा था। लेकिन साल 2022 में रेहाना के वीजा की अवधि समाप्त हो गई। अधिकारियों की सलाह पर उन्हें वीजा रिन्यू कराने के लिए पाकिस्तान जाने को कहा गया।
दिसंबर 2022 के अंत में रेहाना अपने पति परवेज और दोनों बच्चों के साथ कराची गईं। वहां पहुंचने के बाद उन्होंने दोबारा वीजा रिन्यू की प्रक्रिया शुरू की। परवेज और बच्चे भी करीब ढाई महीने तक कराची में ही रहे। परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही औपचारिकताएं पूरी होंगी और वे वापस भारत लौट आएंगे।
लेकिन हालात उम्मीदों के उलट निकले। रेहाना के वीजा में अड़चन आ गई, जबकि भारतीय नागरिक होने के कारण परवेज और बच्चों का वीजा खत्म होने के करीब था। मजबूरी में परवेज बच्चों को लेकर भारत लौट आए, जबकि रेहाना पाकिस्तान में ही फंस गईं। यहीं से इस परिवार की मुश्किलें शुरू हो गईं।
परवेज शेख ने राजकोट कलेक्टर कार्यालय से लेकर दिल्ली स्थित पाकिस्तान एंबेसी तक कई जगह गुहार लगाई। पत्नी को भारत वापस लाने के लिए सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए गए, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इसी बीच भारत सरकार की ओर से ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ और दोनों देशों के बीच सीमाएं बंद कर दी गईं। इसके बाद एंबेसी स्तर पर भी प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई।
कराची में फंसी रेहाना सोशल मीडिया के जरिए भारत सरकार से अपील कर रही हैं कि उन्हें अपने पति और बच्चों के पास आने दिया जाए। वहीं राजकोट में परवेज शेख और उनके बच्चे भी भारत और पाकिस्तान- दोनों सरकारों से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
परवेज बताते हैं कि उनकी शादी मौसी की बेटी से हुई थी और पूरा परिवार भारत में ही बस चुका था। एक-एक और दो-दो साल के लिए वीजा बढ़ता रहा और इसी दौरान बच्चों का जन्म हुआ। जब वे 2022 में भारत लौटे थे, तब उन्हें पूरा भरोसा था कि कुछ ही दिनों में रेहाना को भी वीजा मिल जाएगा। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी पत्नी भारत नहीं आ पाई है।
आज हालात यह हैं कि दोनों मासूम बच्चे पिछले तीन साल से अपनी मां से दूर हैं। बच्चों की देखभाल परवेज की बहन कर रही हैं। बेटी तीसरी कक्षा में पढ़ रही है और बेटा पहली कक्षा में जाने वाला है। परवेज की मां लंबे समय से बीमार हैं और बिस्तर पर हैं, ऐसे में परिवार बहन के घर पर रह रहा है।
परवेज सवाल करते हैं कि इसमें उनके परिवार या बच्चों की क्या गलती है। वे कहते हैं कि अगर सीमा खुले तो वे दोबारा कराची जाने को भी तैयार हैं, बस परिवार एक साथ रह सके। उधर कराची में फंसी रेहाना कहती हैं कि तीन साल से बच्चों के बिना उनका जीवन टूट चुका है। ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता जब वे बच्चों की याद में न रोई हों। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अपील की है कि उन्हें भारत आने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपने बच्चों के साथ रह सकें।