Edited By Parveen Kumar,Updated: 02 Oct, 2026 08:40 PM

'फ्लाईदुबई' के कैप्टन स्मित मच्छार ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कहा कि उन्होंने ठान लिया था कि वह विमान में सवार लोगों की जान नहीं जाने देंगे और हवा में सह-पायलट के हमले के बाद भी, उनमें जितनी भी ताकत बची थी, उसी के सहारे उन्होंने...
नेशनल डेस्क : 'फ्लाईदुबई' के कैप्टन स्मित मच्छार ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कहा कि उन्होंने ठान लिया था कि वह विमान में सवार लोगों की जान नहीं जाने देंगे और हवा में सह-पायलट के हमले के बाद भी, उनमें जितनी भी ताकत बची थी, उसी के सहारे उन्होंने विमान को सुरक्षित बचा लिया। मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक अस्पताल में भर्ती मच्छार से फोन पर बात की। बुधवार को यूएई के दुबई से इजराइल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 के कॉकपिट में सह-पायलट ने मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
मच्छार ने वीडियो कॉल पर प्रधानमंत्री को घटना के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि जब भी वह संकट में होते हैं, तो वह 'हनुमान चालीसा' का पाठ करते हैं। उन्होंने कहा, ''मैं घायल हालत में (कॉकपिट के) फर्श पर पड़ा था। मेरे अंदर जितनी भी ताकत बची थी, मैंने सही कदम उठाया और विमान को सुरक्षित बचा लिया।'' मच्छार ने कहा, ''मैं अपनी जान बचाने के लिए लड़ रहा था, लेकिन साथ ही मैंने ठान लिया था कि मैं दूसरों को नहीं मरने दूंगा। वह बहुत अहम पल था। मैं आंखें बंद करके भी सोच सकता हूं कि विमान में क्या हो रहा था। उस पल मुझे एहसास हुआ कि विमान नीचे गिर रहा है। मुझे कई चोटें आई थीं। मैं बुरी तरह घायल था, लेकिन मैंने खुद से कहा कि मुझे उठना होगा और कुछ करना होगा। उस समय, मैंने कॉकपिट का दरवाज़ा खोलने के लिए पूरी ताकत लगाई। दूसरे लोगों की भूमिका भी उतनी ही अहम थी।'' वीडियो कॉल के दौरान मच्छार अस्पताल में बिस्तर पर थे और उनके सिर पर पट्टी बंधी हुई थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन मच्छार की बहादुरी, सूझबूझ और धैर्य की सराहना करते हुए कहा कि हिंदुस्तानी दूसरों की जान लेने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि वे दूसरों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को तैयार रहते हैं। मोदी ने वीडियो कॉल के दौरान कहा, ''देश गर्व से कह सकता है कि कि हम हिंदुस्तानी जान लेने वाले नहीं, बल्कि दूसरों की जान बचाने के लिए खुद को जोखिम में डालने वाले लोग हैं। आप अपने शरीर पर इतने घाव झेल रहे थे और स्वयं जीवन-मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे थे, उस समय भी आपने अपने जीवन की परवाह नहीं की, सभी यात्रियों के जीवन की परवाह की। सबसे बड़ी बात आपने 140 करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाया है। इसीलिए मैं हृदय से गर्व अनुभव कर रहा हूं।''
मच्छार ने कहा कि वह 17 साल से विमान उड़ा रहे हैं और बतौर कैप्टन उनका अनुभव 11 साल का है। उन्होंने कहा कि सह-पायलट के हमले के दौरान उनके अनुभव ने ही उन्हें अहसास कराया कि अगर वह उस वक्त जरा भी चूके, तो विमान का क्या हश्र होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि जब भी वह किसी संकट में होते हैं, तो 'हनुमान चालीसा' का पाठ करते हैं और उस घड़ी में भी उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ किया। जब प्रधानमंत्री ने इस पर प्रसन्नता जताई, तो पायलट ने जवाब दिया, ''मैं देश से दूर हूं, अपनी संस्कृति से नहीं।''
मच्छार ने कहा कि उन पर बार-बार वार किया गया एवं कई चोटें आईं, लेकिन उन्होंने खुद से कहा कि उन्हें उठना होगा और कुछ करना होगा। उन्होंने कहा, ''उस समय मैंने सोचा कि अगर मैं नहीं उठा... मैं 17 साल से विमान उड़ा रहा हूँ, पिछले 11 साल से कैप्टन हूँ और मुझे आँखें बंद होने पर भी पता होता है कि विमान में क्या हो रहा है। जब मैं नीचे पड़ा था, तो मुझे पक्का पता था कि अगर मैं आखिरी बार एक जोर लगाऊँ - तो दरवाजा ठीक वहीं था। मुझ पर वार हो रहा था, फिर भी मैं दरवाजा खोल पाने में सफल रहा।'' पायलट ने कहा कि कॉकपिट का दरवाजा खुलने के बाद बाकी सभी लोग अंदर आ गए और हर किसी ने बराबर की अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, ''लेकिन सच कहूँ तो, मैं अपने जीवन के लिए ऐसा कर रहा था, फिर भी साथ ही मैंने ठान लिया था कि मैं उन सभी को मरने नहीं दे सकता।''
हनुमान चालीसा का पाठ करने के बारे में मच्छार ने प्रधानमंत्री से कहा, ''जब भी मैं संकट में होता है, तो मेरे मन में बस एक ही बात आती है - मैं हनुमान चालीसा का पाठ करता हूँ। उस समय भी मैं हनुमान चालीसा का ही पाठ कर रहा था, और मुझे पता है कि भगवान ने मुझे बचाया।'' मच्छार ने कहा कि वह मोदी को अपना सबसे बड़ा आदर्श मानते हैं, और प्रधानमंत्री का फोन आने से उनका उत्साह बढ़ा है। उन्होंने कहा, ''मैं अत्यधिक गौरवान्वित हूं। आपका फोन आने से मुझे बहुत गर्व हो रहा है। अब मुझे स्वयं पर गर्व है; पहले ऐसा नहीं था, लेकिन अब है। माफ़ कीजिएगा, मैं आपके सामने रो रहा हूँ।'' इस पर मोदी ने मच्छार से कहा कि अगर वह उनके सामने नहीं नहीं रोएंगे, तो फिर किसके सामने रोएंगे।
मच्छार ने कहा, ''सर, हर सुबह जब मैं पूजा करता हूँ, तो मेरा दो साल का बेटा मेरी गोद में बैठ जाता है और मैं उसे हनुमान चालीसा सुनाता हूँ, क्योंकि मुझे यही सिखाया गया था - भले ही आज हम अपने देश से दूर हैं, लेकिन हमें अपनी संस्कृति से दूर नहीं होना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि अस्पताल के कर्मचारी बहुत प्यार से उनकी अच्छी देखभाल कर रहे हैं। मच्छार ने प्रधानमंत्री से यह भी कहा कि वह अपनी चोट को सिर्फ़ एक घाव के तौर पर नहीं देख रहे हैं, क्योंकि ऐसा करने से उनके ठीक होने की प्रक्रिया और भी मुश्किल हो जाएगी। उन्होंने कहा, ''मैं इसे एक ऐसी यात्रा के तौर पर देख रहा हूँ जो धीरे-धीरे, एक-एक कदम करके आगे बढ़ेगी और जिसमें समय लगेगा। लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि मैं ठीक हो जाऊँगा और फिर से पूरी तरह स्वस्थ हो जाऊँगा।''
मोदी ने पायलट से कहा कि उनके जल्द स्वस्थ होने के लिए देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है और कई भारतीय 'महामृत्युंजय मंत्र' का जाप कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ''आप एक बहादुर इंसान हैं। भारत आपका स्वागत करने का इंतजार कर रहा है।'' मोदी ने मच्छार की मां गीता बेन से भी बात की और कहा कि उन्होंने अपने बेटे का पालन-पोषण 'भगवद गीता' के संस्कारों एवं शिक्षाओं के साथ किया है। प्रधानमंत्री ने पायलट से कहा कि भारत और दुनिया भर के लोग उनसे बात करने के लिए उत्सुक हैं। मोदी ने कहा, ''आपने देश का मान बढ़ाया है।''
प्रधानमंत्री ने कैप्टन मच्छार के उचित इलाज और देखभाल करने के लिए सऊदी अरब तथा यूएई की सरकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। मोदी ने मच्छार से यह भी कहा कि उन्होंने भारतीय पायलट समुदाय का मान बढ़ाया है, जिसे अब दुनिया एक नयी नजर से देखेगी। उन्होंने कहा, ''आज गांधी जयंती है। आपने दुनिया को दिखाया है कि 'अहिंसा' का सही अर्थ क्या होता है।'' मूल रूप से गुजरात के निवासी कैप्टन मच्छार से प्रधानमंत्री ने कुछ देर गुजराती में भी बातचीत की। बाद में, मोदी ने इस वीडियो कॉल के बारे में 'एक्स' पर पोस्ट भी किया।
उन्होंने लिखा, ''कैप्टन स्मित के साथ गर्व और भावनाओं से भरी एक अविस्मरणीय बातचीत।'' दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान एफजेड1073 ने बुधवार को आपात संकेत भेजे थे। इसके बाद विमान 34,000 फुट की ऊंचाई से तेजी से 17,000 फुट से अधिक नीचे आ गया। बाद में, उसका मार्ग सऊदी अरब के तबूक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्देल अजीज हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया गया। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे।