Abdominal Obesity: भारत में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं पेट के मोटापे की शिकार, शोध में चौंकाने वाले खुलासे

Edited By Updated: 31 Mar, 2026 11:00 AM

in india more women than men suffer from abdominal obesity

एक ताजा अध्ययन के अनुसार, भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाएं पेट के मोटापे (Abdominal Obesity) का अधिक शिकार हो रही हैं।

Abdominal Obesity : भारत एक गंभीर और छिपी हुई 'मेटाबॉलिक इमरजेंसी' की कगार पर खड़ा है। हाल ही में जारी एक चौंकाने वाले अध्ययन के अनुसार, देश में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में पेट का मोटापा (Abdominal Obesity) तेजी से बढ़ रहा है। 'डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम: क्लिनिकल रिसर्च एंड रिव्यूज' में प्रकाशित यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि भारत में कमर का बढ़ता घेरा अब केवल सौंदर्य संबंधी समस्या नहीं, बल्कि जानलेवा बीमारियों का अग्रदूत बन चुका है। 

हर दूसरी महिला प्रभावित: डराने वाले आंकड़े 

अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि 30 से 49 वर्ष की आयु वर्ग की हर 10 में से लगभग 6 भारतीय महिलाएं पेट के मोटापे से ग्रस्त हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के डेटा का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में लगभग 40% महिलाएं और 12% पुरुष इस समस्या से जूझ रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि यह ट्रेंड अब किशोरियों और युवा लड़कियों में भी तेजी से फैल रहा है। 

मोटापे के नए मानक: BMI नहीं, कमर की माप है जरूरी 

विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक मोटापे को मापने के लिए इस्तेमाल होने वाला 'बॉडी मास इंडेक्स' (BMI) एशियाई भारतीयों के लिए सटीक पैमाना नहीं है। गोरे लोगों की तुलना में भारतीयों में कम BMI होने पर भी शरीर (विशेषकर अंगों के आसपास) में फैट की मात्रा अधिक होती है। पेट का मोटापा केवल त्वचा के नीचे की चर्बी नहीं है, बल्कि यह लिवर और पैंक्रियास जैसे महत्वपूर्ण अंगों के आसपास जमा होता है, जो मेटाबॉलिक बीमारियों का मुख्य कारण है। शोधकर्ता अब BMI के बजाय कमर की गोलाई (Waist Circumference) और कमर-से-ऊंचाई के अनुपात (Waist-to-Height Ratio) को जोखिम आकलन का आधार बनाने की सलाह दे रहे हैं। 

बदलती जीवनशैली और बढ़ता जोखिम 

अध्ययन के अनुसार, यह समस्या अब केवल शहरों या उच्च आय वर्ग तक सीमित नहीं रह गई है। गांवों और निम्न-मध्यम आय वाले परिवारों में भी पेट का मोटापा तेजी से बढ़ा है। इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं: 

  • शहरीकृत जीवनशैली और शारीरिक सक्रियता में कमी। 
  • खान-पान में बदलाव (नॉन-वेज और हाई-कैलोरी डाइट)। 
  • बचपन में कुपोषण के बाद अचानक जीवनशैली में आए तीव्र बदलाव। 

गंभीर बीमारियों का घर 

पेट का मोटापा बढ़ने से कई घातक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिनमें शामिल हैं: 

  • हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज। 
  • पुरानी किडनी की बीमारी (CKD)। 
  • मेटाबॉलिक लिवर डिजीज (MASLD)। 
  • महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर जैसे कुछ विशिष्ट प्रकार के कैंसर। 
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