Edited By Parveen Kumar,Updated: 15 Apr, 2026 06:02 PM

मिडिल ईस्ट जंग के बीच भारत के साथ-साथ कई अन्य देशों पर भी एलपीजी का संकट बढ़ा है। एलपीजी की किल्लत होने के कारण भारत में कई कंपनियों ने नए नियम लागू कर दिए। LPG का खतरा देश के कई राज्यों को भुगतना पड़ा, जिसका असर स्ट्रीट फूड पर भी पड़ा और कई होटलों...
नेशनल डेस्क : मिडिल ईस्ट जंग के बीच भारत के साथ-साथ कई अन्य देशों पर भी एलपीजी का संकट बढ़ा है। एलपीजी की किल्लत होने के कारण भारत में कई कंपनियों ने नए नियम लागू कर दिए। LPG का खतरा देश के कई राज्यों को भुगतना पड़ा, जिसका असर स्ट्रीट फूड पर भी पड़ा और कई होटलों में भी प्रतिबंध लगाए गए। बताया जा रहा है कि LPG की किल्लत सिर्फ जंग तक नहीं, बल्कि अगले 3-4 सालों तक रह सकती है क्योंकि अभी इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि प्रोडक्शन कुछ समय के लिए रुका है या उसे हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा है।
देश की LPG पर मंडराया सकंट
अमेरिका-इजरायल के बीच चले युद्ध के कारण ईरान ने इलाके के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया, जिससे देश की एलपीजी सप्लाई पर गहरा सकंट पड़ गया। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट में अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि सप्लायर्स से मिली जानकारी के आधार पर, सप्लाई को फिर से शुरू करने में कम से कम तीन साल लग सकते हैं, और शायद उससे भी ज्यादा समय लग सकता है. उन्होंने भारत के बढ़ते इंपोर्ट रिस्क और कॉस्ट के दबाव की ओर इशारा किया।
भारत में कितनी है LPG की मांग
मार्च महीने से लेकर अब तक घरेलू सिलेंडरों में 60 रुपए की वृदि्ध हुई, जबकि कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में 115 रुपए बढ़ गए है। LPG की सालाना मांग लगभग 33 मिलियन टन है, और मार्च के मिड तक हमारे पास सिर्फ 15 दिनों की खपत के बराबर ही स्टोरेज क्षमता थी। आमतौर यहीं वजह होती है कि जब कंपनियों के पास स्टॉक नहीं होता को दाम बढ़ाए जाते है।