समंदर में चीन को घेरने का प्लान; भारत में एंटी-शिप मिसाइलों की फायरिंग ड्रिल करेगा जापान, तैयारी के लिए भेजी अपनी टीम

Edited By Updated: 28 Oct, 2026 02:52 PM

japan confirms dispatch to india to explore anti ship missile drills

जापान ने भारत में सतह से समुद्र पर मार करने वाली मिसाइलों और छोटे हमलावर ड्रोन के संभावित अभ्यास की संभावनाएं तलाशने के लिए अधिकारियों की टीम भेजी है। जापानी सैन्य प्रमुख ने इसकी पुष्टि की। अभी मिसाइल प्रणाली, स्थान और समय तय नहीं हैं। यह पहल दोनों...

Tokyo: जापान समंदर में चीन को घेरने के लिए भारत में अपनी सतह से समुद्र पर मार करने वाली मिसाइलों और छोटे हमलावर ड्रोन के साथ सैन्य अभ्यास करने की संभावनाएं तलाश रहा है। इसके लिए जापान की थल आत्मरक्षा बल (जीएसडीएफ) ने अपने अधिकारियों को भारत भेजा था। जापान की थल आत्मरक्षा बल के प्रमुख जनरल अराई मसायोशी ने 27 अक्टूबर को संवाददाता सम्मेलन में इसकी पुष्टि की।  अराई ने कहा कि भारत के साथ विभिन्न मुद्दों पर समन्वय स्थापित करने के लिए अधिकारियों को भेजा गया था। इससे पहले जापान के सार्वजनिक प्रसारक एनएचके ने 21 अक्टूबर को खबर दी थी कि रक्षा मंत्रालय के अधिकारी अक्टूबर के मध्य में भारत आए थे। उन्होंने करीब एक सप्ताह तक यहां परीक्षण सुविधाओं और फायरिंग रेंज का निरीक्षण किया था।

 

हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि अभ्यास में किस मिसाइल प्रणाली का इस्तेमाल होगा। सैन्य अभ्यास आयोजित करने पर भी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
 जापान की इस पहल के पीछे एक बड़ी चुनौती लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों का प्रभावी प्रशिक्षण है। अराई ने कहा कि सतह से समुद्र पर मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों के मामले में उनकी पूरी मारक क्षमता का इस्तेमाल करते हुए प्रशिक्षण आयोजित करना एक बड़ी चुनौती है। जापान अपने देश में उपयुक्त प्रशिक्षण स्थल उपलब्ध कराने के साथ विदेशों में मौजूद सैन्य सुविधाओं के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है। जापान की सैन्य क्षमताओं में लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों का महत्व बढ़ रहा है। ऐसे हथियार हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सैनिकों को उन्हें प्रभावी ढंग से तैनात करने और संचालित करने का प्रशिक्षण देना भी जरूरी है।

 

 जापान की नई टाइप-25 सतह से समुद्र पर मार करने वाली निर्देशित मिसाइल इस बदलती सैन्य क्षमता का उदाहरण है। इसे मार्च 2026 में जापान के कुमामोतो प्रांत स्थित केंगुन सैन्य शिविर में तैनात किया गया था। इस मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 1,000 किलोमीटर मानी जाती है, जबकि इससे पहले इस्तेमाल की जाने वाली टाइप-12 मिसाइल की मारक क्षमता करीब 200 किलोमीटर थी। भारत और जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार हैं। दोनों देश पहले से द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास करते हैं और अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ चार देशों के समूह क्वाड में भी सहयोग करते हैं। क्षेत्र में चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों और जटिल होते सुरक्षा वातावरण के बीच भारत-जापान रक्षा संबंधों का महत्व बढ़ा है। अराई ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार है और तेजी से जटिल होते सुरक्षा वातावरण में विभिन्न प्रकार के रक्षा सहयोग तथा आदान-प्रदान को बढ़ावा देना जरूरी है। 

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