Edited By Tanuja,Updated: 26 Oct, 2026 07:31 PM

चीन तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर करीब 168 अरब डॉलर की लागत से विशाल बांध बना रहा है। चीनी शोधकर्ताओं के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से नदी का जलप्रवाह और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। परियोजना के पास सक्रिय भूगर्भीय भ्रंश को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसका...
Bejing: चीन द्वारा तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर करीब 168 अरब डॉलर की लागत से विशाल जलविद्युत बांध बनाया जा रहा है। यह बांध पूरा होने पर इसकी स्थापित क्षमता 60,000 मेगावाट से अधिक होने की उम्मीद है। इस बीच, चीनी शोधकर्ताओं ने नदी में भविष्य में जलप्रवाह बढ़ने और बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका जताई है। चीनी विज्ञान अकादमी और युन्नान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पेड़ों के छल्लों के अध्ययन के आधार पर वर्ष 1325 से 2020 तक नदी के बहाव का पुनर्निर्माण किया। जलवायु आंकड़ों के साथ तैयार मॉडल के अनुसार, भविष्य में नदी का जलप्रवाह और अत्यधिक बहाव वाली घटनाएं बढ़ सकती हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा कि तिब्बती पठार वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है। इससे बर्फ की परत और जलचक्र प्रभावित हो रहे हैं। नदी में बदलाव का असर दक्षिण एशिया में बाढ़ और सूखे के स्वरूप पर भी पड़ सकता है। जुलाई में चीनी भूवैज्ञानिकों ने प्रस्तावित बांध के नीचे मौजूद सक्रिय भूगर्भीय भ्रंश को लेकर चिंता जताई थी। ऐसी दरारों में दोबारा हलचल होने से भूकंप का खतरा पैदा हो सकता है। शोधकर्ताओं ने ढलानों को मजबूत करने और भूस्खलन रोकने के लिए सुरक्षात्मक उपाय अपनाने की सलाह दी।
ब्रह्मपुत्र तिब्बत से निकलकर भारत में प्रवेश करती है। अरुणाचल प्रदेश में इसे सियांग कहा जाता है और आगे यह ब्रह्मपुत्र कहलाती है। इसके बाद नदी बांग्लादेश की ओर बहती है। चीन का यह बांध भारत और बांग्लादेश के लिए जलप्रवाह तथा बाढ़ प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। चीन का कहना है कि परियोजना से निचले प्रवाह वाले देशों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का अध्ययन किया गया है। हालांकि, नदी के भविष्य के जलप्रवाह और बांध की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।