Edited By Tanuja,Updated: 23 Jun, 2026 12:04 PM

वैंकूवर में आयोजित एक योग कार्यक्रम के दौरान खालिस्तान समर्थक कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने का दावा करते हुए सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। आलोचकों ने आरसीएमपी (RCMP) की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि समर्थक इसे अभिव्यक्ति की...
International Desk: कनाडा के वैंकूवर में आयोजित एक सार्वजनिक योग कार्यक्रम के दौरान खालिस्तान समर्थक घुस आए और हंगामा शुरू कर दिया खालिस्तान समर्थक समूह सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। कार्यक्रम में भारतीय वाणिज्य दूतावास के एक वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। आलोचकों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने मेगाफोन, झंडों और राजनीतिक नारों के माध्यम से कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न किया, जिससे वहां मौजूद परिवारों और प्रतिभागियों को असुविधा हुई।
🚨Khalistani Ruin Peaceful Yoga Event in Vancouver – Why No Action from RCMP?#Khalistani extremists from #SFJ shamelessly hijacked a peaceful public yoga event in Vancouver, storming the park with flags, megaphones, & inflammatory slogans to harass an Indian consul general &… pic.twitter.com/O1Oi4Uf22e
— Ethan 🇨🇦 (@Ethan113554) June 21, 2026
घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने Royal Canadian Mounted Police (RCMP) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में बार-बार होने वाले ऐसे प्रदर्शनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।कुछ टिप्पणीकारों ने आरोप लगाया कि अलगाववादी विचारधारा से जुड़े समूहों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर विशेष छूट मिल रही है, जबकि अन्य नागरिकों पर सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर अधिक प्रतिबंध लागू किए जाते हैं। दूसरी ओर, नागरिक अधिकारों से जुड़े कुछ लोग तर्क देते हैं कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है।

उनका कहना है कि जब तक कोई प्रदर्शन हिंसक नहीं होता या कानून का उल्लंघन नहीं करता, तब तक उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में देखा जाना चाहिए। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यदि किसी सार्वजनिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम को जानबूझकर बाधित किया जाता है, तो यह केवल विरोध प्रदर्शन का मामला नहीं रह जाता और कानून-व्यवस्था का विषय बन सकता है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और कनाडा दोनों देश हाल के वर्षों में तनावपूर्ण रहे द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में सार्वजनिक आयोजनों में होने वाली राजनीतिक गतिविधियां एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई हैं।