Edited By Tanuja,Updated: 20 Jun, 2026 03:43 PM

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर के लेबनान को लेकर दिए गए विवादित बयान पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इजरायल के उकसाऊ बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं दे रही,...
International Desk: इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर (Itamar Ben-Gvir) के लेबनान संबंधी विवादित बयान को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश (Jairam Ramesh)ने केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया मंच X पर जारी बयान में जयराम रमेश ने कहा कि हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान समझौते का दुनिया भर में सावधानीपूर्वक स्वागत किया गया है, लेकिन इस समझौते और क्षेत्रीय शांति के सामने सबसे बड़ा खतरा इजरायल की ओर से आ रहा है। उन्होंने कहा कि इजरायल के एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा पूरे लेबनान को जलाने जैसी बात कहना बेहद गंभीर है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इस तरह के बयानों पर हमेशा की तरह चुप है। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की इजरायल के प्रति "अंधभक्ति" भारत के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा रही है।
क्या कहा इजरायली मंत्री ने?
इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir ने सोशल मीडिया पर एक बेहद आक्रामक बयान देते हुए लेबनान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करने की वकालत की।उन्होंने कहा कि इजरायल की माताओं के हर आंसू के बदले हजारों लेबनानी माताओं को रोना चाहिए और लेबनान को पूरी तरह जला दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल की पहली जिम्मेदारी अपने नागरिकों और सैनिकों की सुरक्षा है तथा मध्य-पूर्व में केवल संयम से नहीं बल्कि कठोर कार्रवाई से जीत हासिल की जा सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब इजरायल और लेबनान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। सीमा क्षेत्रों में हमले और जवाबी कार्रवाई की घटनाएं क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
फिलहाल भारत सरकार या विदेश मंत्रालय की ओर से इजरायली मंत्री की टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि भारत लगातार पश्चिम एशिया में शांति, संवाद और कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है। जयराम रमेश के बयान के बाद भारत की पश्चिम एशिया नीति और इजरायल के साथ संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की गई है।