Edited By Anu Malhotra,Updated: 16 Mar, 2026 09:13 AM

1993 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘खलनायक’ का गाना 'चोली के पीछे' आज भी शादियों और महफिलों की जान बना हुआ है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कभी इसी गाने को दूरदर्शन पर बैन कर दिया गया था। संजय दत्त और माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया यह गाना, जिसे मशहूर...
Bollywood News: 1993 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘खलनायक’ का गाना 'चोली के पीछे' आज भी शादियों और महफिलों की जान बना हुआ है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कभी इसी गाने को दूरदर्शन पर बैन कर दिया गया था। संजय दत्त और माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया यह गाना, जिसे मशहूर लोकगायिका इला अरुण की आवाज़ ने अलग पहचान दी, उस समय अपने बोल और अंदाज़ की वजह से विवादों में आ गया था।
रिलीज़ के बाद जहां दर्शकों ने इसे हाथों-हाथ लिया, वहीं कुछ लोगों ने इसे अश्लील बताते हुए विरोध किया। विवाद इतना बढ़ा कि सरकारी चैनल दूरदर्शन ने इस गाने के प्रसारण पर रोक लगा दी। दिलचस्प बात यह है कि 32 साल बाद भी यह गाना अपनी लोकप्रियता बरकरार रखे हुए है और आज भी शादी-पार्टियों में बजते ही माहौल बना देता है।
बता दें कि इला अरुण भारतीय मनोरंजन जगत का वो नाम हैं जिन्होंने न केवल अपनी भारी और विशिष्ट आवाज़ से संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि अपनी अदाकारी से भी पर्दे पर अमिट छाप छोड़ी। 15 मार्च 1954 को राजस्थान की ऐतिहासिक धरती जोधपुर में जन्मीं इला का व्यक्तित्व उनकी मिट्टी की तरह ही जीवंत और बेबाक है। उन्होंने राजस्थानी लोक संगीत की सुगंध को बॉलीवुड के आधुनिक सांचे में इस तरह पिरोया कि वह 90 के दशक की सबसे प्रभावशाली महिला गायिकाओं में शुमार हो गईं। उनके करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर साल 1993 में आई फिल्म 'खलनायक' का गाना 'चोली के पीछे क्या है' साबित हुआ, जिसने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।
'चोली के पीछे' की गूंज दूरदर्शन पर हो गई थी बैन
यह गाना भारतीय संगीत इतिहास के उन चंद नगमों में से एक है जिसने जितनी लोकप्रियता बटोरी, उतना ही विवाद भी झेला। अल्का याग्निक के साथ मिलकर गाए गए और माधुरी दीक्षित पर फिल्माए गए इस गाने को इसके साहसी बोलों के कारण 'अश्लील' करार दिया गया। विरोध की आग इतनी बढ़ी कि उस दौर में सरकारी चैनल दूरदर्शन ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। सार्वजनिक मंचों पर इला से इस गाने को न गाने की मांग तक की गई, लेकिन इला अरुण अपने पक्ष पर अडिग रहीं। उनका मानना था कि उनके गीत ग्रामीण परिवेश की सच्चाई और लोक संस्कृति का हिस्सा हैं, न कि फूहड़ता का। इसी गाने के लिए उन्होंने फिल्मफेयर का प्रतिष्ठित पुरस्कार भी जीता और आज तीन दशक बाद भी यह गाना शादियों और पार्टियों की पहली पसंद बना हुआ है।
संगीत की दुनिया में पहचान
इला अरुण की गायकी का दायरा केवल एक हिट गाने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने लता मंगेशकर जैसे दिग्गज फनकारों के साथ 'मोरनी बागा मा बोले' (हम आपके हैं कौन) और 'करण अर्जुन' में 'गुप चुप गुप चुप' जैसे कालजयी गीत गाए। उनकी प्रतिभा की गूंज केवल भारत ही नहीं बल्कि सात समंदर पार भी सुनाई दी, जब उन्होंने ऑस्कर विजेता फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के चर्चित गीत 'रिंगा रिंगा' को अपनी आवाज़ दी। इतना ही नहीं, उन्होंने भाषाई सीमाओं को तोड़ते हुए तमिल और तेलुगु सिनेमा में भी अपनी गायकी का लोहा मनवाया।
अदाकारी के जरिए किरदारों में फूंकी जान
गायकी में महारत हासिल करने के साथ-साथ इला ने अभिनय के क्षेत्र में भी अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। हालांकि उन्होंने अधिकतर सहायक भूमिकाएं निभाईं, लेकिन उनके द्वारा निभाए गए हर किरदार में एक अलग गहराई नज़र आई। साल 2008 में आशुतोष गोवारिकर की फिल्म 'जोधा अकबर' में 'महाम अंगा' (अकबर की पालक मां) के रूप में उनका कठोर और प्रभावशाली अभिनय आज भी दर्शकों के ज़हन में ताज़ा है। इसके अलावा 'चाइना गेट', 'वेलकम टू सज्जनपुर', 'वेल डन अब्बा' और 'बेगम जान' जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी उपस्थिति से कहानी को मजबूती दी।