खरगे ने आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया, आयोग का कदम नैसर्गिक न्याय के खिलाफ : कांग्रेस

Edited By Updated: 24 Apr, 2026 12:23 AM

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कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग द्वारा पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को दिए कारण बताओ नोटिस पर बृहस्पतिवार को आयोग को शुरुआती जवाब भेजा। पार्टी ने दावा दिया कि खरगे ने आचार संहिता का कोई उल्लंघन नहीं किया है तथा आयोग का यह कदम नैसर्गिक न्याय के खिलाफ...

नेशनल डेस्क : कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग द्वारा पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को दिए कारण बताओ नोटिस पर बृहस्पतिवार को आयोग को शुरुआती जवाब भेजा। पार्टी ने दावा दिया कि खरगे ने आचार संहिता का कोई उल्लंघन नहीं किया है तथा आयोग का यह कदम नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है और इसमें कोई गुप्त मंसूबा दिखाई पड़ता है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजे पत्र में विस्तार से जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय भी मांगा है।

निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ''आतंकवादी'' कहे जाने का बुधवार को 'गंभीरता से' संज्ञान लिया था और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। रमेश ने दावा किया कि आयोग की ओर से नोटिस जारी करते समय विवेक का इस्तेमाल नहीं किया गया और खरगे को दो नोटिस जारी कर दिए गए। उन्होंने कहा, "हम आपका ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित करना चाहेंगे कि एक नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि आदर्श आचार संहिता का कथित तौर पर उल्लंघन अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ'ब्रायन की दिनांक 21.04.2026 की शिकायत पर आधारित था।

दूसरा नोटिस जो आपकी वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है, उसमें अजीब तरह से शिकायतकर्ता के रूप में उनका नाम हटा दिया गया है।" उन्होंने कहा कि यह उस आकस्मिक और नियमित तरीके को इंगित करता है जिसमें आयोग केवल सत्तारूढ़ पार्टी के शिकायतकर्ताओं के बयानों के आधार पर और बिना किसी सोच विचार के और जवाब दाखिल करने के लिए महज 24 घंटे का समय देकर कारण बताओ नोटिस जारी कर रहा है। उन्होंने कहा, "सबसे पहले हम कांग्रेस अध्यक्ष को नोटिस में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब देने के लिए दिए गए 24 घंटे के समय पर आश्चर्य व्यक्त करना चाहेंगे।

आप जानते होंगे कि यह निश्चित रूप से पर्याप्त समय नहीं है, क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष इन दिनों चुनाव प्रचार करने में व्यस्त हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि आयोग नैसर्गिक न्याय के निर्वहन के बजाय एक औपचारिकता के रूप में नोटिस को क्रियान्वित कर रहा है।'' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन और गृह मंत्री अमित शाह के एक कथित बयान का हवाला देते हुए कहा, "हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि खरगे का बयान आचार संहिता या किसी अन्य कानून का कोई उल्लंघन नहीं है। यदि ऊपर उद्धृत उदाहरण (प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के कथन) किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं करते हैं, तो कांग्रेस अध्यक्ष का बयान भी किसी कानून का उल्लंघन नहीं है।''

रमेश ने कहा, "हमें आपको यह भी याद दिलाने की जरूरत नहीं है कि हमने ऐसे कई उदाहरण दिए हैं, जिनमें हमने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ शिकायतें दर्ज की हैं और आपके द्वारा अतीत में कोई कार्रवाई नहीं की गई।'' उन्होंने कहा, "हम आपके अधिकारियों द्वारा अपनाई गई भाषा पर भी कड़ी आपत्ति जताना चाहेंगे जिसमें वे बिना कोई संदर्भ दिए कार्रवाई करने की धमकी देते हैं और इस तथ्य के बावजूद कि उन्होंने लापरवाही से दो अलग-अलग नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा, ऐसा लगता है कि नोटिस जारी करने में विवेक का इस्तेमाल नहीं किया गया और व्यस्त चुनाव कार्यक्रम जानने के बावजूद उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए महज 24 घंटे का समय दिया है।"

कांग्रेस अध्यक्ष ने पिछले दिनों चेन्नई में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अन्नाद्रमुक के भाजपा के साथ गठबंधन की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री को ''आतंकवादी'' कहा था। हालांकि, जब पत्रकारों ने उनसे टिप्पणी के संदर्भ को स्पष्ट करने पर जोर दिया तो खरगे ने कहा कि उनका मतलब था कि प्रधानमंत्री देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को 'आतंकित' कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था, ''वह (मोदी) लोगों और राजनीतिक दलों को आतंकित कर रहे हैं। मैंने कभी नहीं कहा कि वह (शाब्दिक अर्थ में) आतंकवादी हैं। आतंकित करने का यह अभिप्राय है… वह अपने पद की शक्ति और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रहे हैं और विपक्षी दलों को अपशब्द कह रहे हैं।''

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