PoJK हिंसा ने बेनकाब किया चीन-पाकिस्तान का खेल, प्रदर्शनकारियों की मौत ने खोली CPEC मॉडल की खोली पोल

Edited By Updated: 03 Aug, 2026 07:38 PM

killing of protesters exposes limits of china pakistan development in pojk

ब्रिटेन के अखबार Asian Lite की रिपोर्ट के अनुसार, PoJK में प्रदर्शनकारियों की मौत और बढ़ते विरोध ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) आधारित विकास मॉडल पर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट का दावा है कि विकास परियोजनाओं के बावजूद स्थानीय लोगों की...

Islamabad: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में जारी विरोध प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों की मौतों ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) आधारित विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्रिटेन के समाचार पत्र एशियन लाइट (Asian Lite) में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, हालिया घटनाक्रम यह दिखाता है कि बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बावजूद स्थानीय लोगों की राजनीतिक भागीदारी और आर्थिक अधिकारों की मांग पूरी नहीं हो सकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कई सप्ताह से PoJK में विरोध प्रदर्शन, गिरफ्तारियां और प्रशासनिक प्रतिबंध जारी हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें दोनों पक्षों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि संचार सेवाओं पर प्रतिबंध और स्वतंत्र जानकारी की कमी के कारण वास्तविक स्थिति की पूरी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।

 

रिपोर्ट के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) कर रही है। इस संगठन में ट्रांसपोर्टर, व्यापारी और नागरिक समाज के विभिन्न समूह शामिल हैं। उनकी प्रमुख मांगों में बिजली दरों में कमी, खाद्य पदार्थों की कीमतों पर राहत, सरकारी विशेषाधिकारों में सुधार, स्थानीय संसाधनों में हिस्सेदारी और बेहतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व शामिल हैं। रिपोर्ट का दावा है कि इन मांगों का समाधान निकालने के बजाय पाकिस्तान ने सुरक्षा बलों के जरिए कड़ी कार्रवाई की, जिससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि PoJK अब चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का अहम हिस्सा बन चुका है। चीन इस परियोजना को संपर्क, ऊर्जा और आर्थिक विकास का मॉडल बताता है, लेकिन रिपोर्ट का कहना है कि यह व्यवस्था मुख्य रूप से पाकिस्तान सरकार के माध्यम से संचालित होती है और स्थानीय लोगों की भागीदारी सीमित रहती है। रिपोर्ट के अनुसार, बुनियादी ढांचे का विकास किसी क्षेत्र की आर्थिक और रणनीतिक अहमियत तो बढ़ा सकता है, लेकिन यदि स्थानीय समुदायों को संसाधनों और विकास योजनाओं पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं मिलता, तो असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान बार-बार बल प्रयोग के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इससे मूल समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा। स्थानीय आबादी लंबे समय से आर्थिक अधिकार, संसाधनों के न्यायसंगत वितरण और राजनीतिक भागीदारी की मांग कर रही है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि चीन का निवेश और पाकिस्तान की सुरक्षा नीति फिलहाल स्थिति को नियंत्रित कर सकती है, लेकिन जब तक स्थानीय लोगों को निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक असंतोष बना रह सकता है। 

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