दिल्ली के शालीमार बाग में देर रात कार्रवाई, मदीना मस्जिद और अन्य इमारतों को गिराया

Edited By Updated: 23 Sep, 2026 10:23 AM

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दिल्ली के शालीमार बाग में मैक्स हॉस्पिटल रोड पर सिविक अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाने और सड़क चौड़ी करने के अभियान के तहत देर रात तोड़-फोड़ की कार्रवाई की। भारी सुरक्षा के बीच मदीना मस्जिद और उससे जुड़ी इमारतों के कुछ हिस्सों को गिरा दिया गया। स्थानीय...

नई दिल्ली : दिल्ली के शालीमार बाग में मैक्स हॉस्पिटल रोड पर सिविक अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाने और सड़क चौड़ी करने के अभियान के तहत देर रात तोड़-फोड़ की कार्रवाई की। भारी सुरक्षा के बीच मदीना मस्जिद और उससे जुड़ी इमारतों के कुछ हिस्सों को गिरा दिया गया। स्थानीय अधिकारियों ने मदीना मस्जिद और आस-पास की इमारतों के हिस्सों को हटाने के लिए देर रात बुलडोज़र तैनात किए। मौके पर पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान तैनात किए गए थे और आस-पास की सड़कों पर भी सुरक्षा बल मौजूद थे। 

इस कार्रवाई के दौरान नगर निगम के अधिकारी कई बुलडोजर और डंपर के साथ मौके पर मौजूद थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि शालीमार गांव में स्थित लगभग 30 साल पुरानी मदीना मस्जिद के खिलाफ यह तोड़-फोड़ की कार्रवाई की गई। प्रशासन के अनुसार जिन इमारतों को हटाया जा रहा था, वे सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जे थे। अधिकारियों ने कहा कि यह तोड़-फोड़ अभियान सड़क चौड़ी करने के आधिकारिक प्रोजेक्ट का हिस्सा था, जिसका मकसद सड़क पर रुकावटें दूर करना और ट्रैफिक जाम कम करना था। 

देर रात की इस कार्रवाई से विवाद खड़ा हो गया, क्योंकि विपक्ष के नेता और स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधि विरोध करने के लिए मौके पर पहुंच गए। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे और जिस तरह से तोड़-फोड़ की गई, उस पर सवाल उठाए। IANS से ​​बात करते हुए AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमाई ने कहा, 'हमें देर रात करीब 11:30 बजे बैरिस्टर ओवैसी साहब का मैसेज मिला कि ऐसी घटना हुई है... मैंने तुरंत अपनी स्थानीय टीम को हालात का जायजा लेने भेजा। पता चला कि शालीमार गांव में जहां मस्जिद को लेकर कोर्ट में मामला चल रहा था, वहां देर रात अंधेरे में और सारी लाइटें बंद करके ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए बुलडोज़र लाए गए।' 

उन्होंने आगे कहा, 'मस्जिद के इमाम और स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्हें पवित्र कुरान निकालने का समय भी नहीं दिया गया। यह जुल्म की हद है कि दिल्ली या देश को पता चले बिना अंधेरे में ऐसी कार्रवाई की जा रही है... हम कानून-व्यवस्था की कोई समस्या पैदा करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। हम स्थानीय अधिकारियों से बहुत सम्मानपूर्वक बात कर रहे हैं और उनसे स्थानीय लोगों से बात करने की अनुमति मांग रहे हैं; लेकिन हमें मना किया जा रहा है... क्या मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बता सकती हैं कि विपक्ष के नेता को स्थानीय लोगों से मिलने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है?।' 

शालीमार बाग वह विधानसभा क्षेत्र है जिसका प्रतिनिधित्व दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता करती हैं। मदीना मस्जिद के अध्यक्ष मोविन खान ने कहा कि मामला अभी भी अदालत में है और दावा किया कि मस्जिद प्रशासन दस्तावेजों की मांग कर रहा था और दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा जारी नोटिसों का जवाब भी दिया था। खान ने कहा, 'मामला अभी भी अदालत में है... वकील की सलाह पर, दस्तावेजों की साफ प्रतियां (legible copies) मांगने के लिए एक नई अर्जी दाखिल की गई ताकि सही जवाब तैयार किया जा सके, लेकिन इसी बीच MCD ने पहले एक नोटिस, फिर दूसरा नोटिस और फिर तीसरा नोटिस जारी कर कहा कि 15 दिनों के भीतर तोड़-फोड़ की कार्रवाई की जाएगी।' 

उन्होंने कहा कि इसके बाद मामला अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) में ले जाया गया, जहां ढांचे के विभिन्न हिस्सों की उम्र और स्थिति के बारे में दलीलें सुनी गईं। उन्होंने कहा, 'यह कहा गया कि बिजली मीटर वाली एक मंजिल को मान्यता दी गई थी जबकि बाकी ढांचे को नया निर्माण माना गया; जब हमने उनसे दीवारों पर लगे प्लास्टर की उम्र की जांच करने को कहा और बताया कि हमने 2001 में ही तीन मंजिलें बनाई थीं और उन साइट प्लान को अदालत में जमा किया था, तो जज ने नक्शों या हमारी दलीलों पर कोई ध्यान नहीं दिया और फैसला सुनाया कि ऊपरी मंजिलों को तोड़ा जा सकता है।' 

उन्होंने आगे कहा, 'जज ने कहा था कि ऊपरी मंजिलों को तोड़ा जाएगा लेकिन कभी यह नहीं बताया कि कब और कैसे... अचानक कल वे आए और प्रक्रिया शुरू कर दी।' मदीना मस्जिद के इमाम जरीफुर रहमान ने भी उस आधार पर सवाल उठाया जिसके तहत मस्जिद को अवैध ढांचा करार दिया जा रहा था और आरोप लगाया कि शालीमार इलाके में कई अन्य संपत्तियों के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था थी। 

रहमान ने बताया, 'इसे अवैध करार दिया जा रहा है, लेकिन शालीमार में हर किसी के पास जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी है, और इलाके का हर घर इसी पावर-ऑफ-अटॉर्नी के आधार पर बना है, फिर भी केवल मस्जिद को ही अवैध बताकर निशाना बनाया जा रहा है।' उन्होंने कहा कि मस्जिद प्रशासन ने कानूनी तरीकों से मामले को आगे बढ़ाया था और तोड़-फोड़ की कार्रवाई शुरू होने से पहले अधिकारियों को अपना जवाब सौंप दिया था। उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन इन सबके बावजूद, MCD ने अगले ही दिन एक नोटिस जारी कर मस्जिद को गिराने या नगर निकाय की कार्रवाई का सामना करने के लिए 15 दिन की समय-सीमा दे दी।' 

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