बैंक को लगाया चूना... नकली सोना गिरवी रखकर लिया 57 लाख का लोन, 16 लोगों पर मामला दर्ज

Edited By Updated: 11 Apr, 2026 06:06 PM

loan of 57 lakhs secured by pledging fake gold

प्रयागराज के सिविल लाइंस स्थित एक प्राइवेट बैंक शाखा में गोल्ड लोन के नाम पर बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ठगों ने बेहद शातिर तरीके से नकली सोना गिरवी रखकर असली गोल्ड लोन हासिल...

नेशनल डेस्क : प्रयागराज के सिविल लाइंस स्थित एक प्राइवेट बैंक शाखा में गोल्ड लोन के नाम पर बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ठगों ने बेहद शातिर तरीके से नकली सोना गिरवी रखकर असली गोल्ड लोन हासिल कर लिया और बैंक को लाखों रुपये का चूना लगा दिया।

16 नामजद, कई अज्ञात आरोपी… पुलिस जांच में जुटी

इस मामले में बैंक के सहायक महाप्रबंधक पंकज वर्मा की तहरीर पर सिविल लाइंस थाने में 16 नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुल 18 गोल्ड लोन खातों के जरिए यह फर्जीवाड़ा किया गया।

57 लाख का लोन, ब्याज सहित 64 लाख पार

जांच के अनुसार, आरोपियों ने इन खातों के माध्यम से बैंक से करीब 57 लाख 19 हजार 800 रुपये का गोल्ड लोन लिया। समय के साथ ब्याज जुड़ने पर यह रकम बढ़कर 64 लाख रुपये से अधिक हो गई। यह पूरा घोटाला योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया, जिसमें बैंक की प्रक्रियाओं का फायदा उठाया गया।

ऐसे हुआ खुलासा… जब दोबारा जांच में खुली पोल

इस फ्रॉड का पर्दाफाश तब हुआ, जब बैंक ने अपनी नियमित प्रक्रिया के तहत गिरवी रखे गए सोने की दोबारा जांच कराई। दूसरी बार जांच में सामने आया कि जो सोना गिरवी रखा गया था, वह असली नहीं बल्कि नकली था। इसके बाद बैंक में हड़कंप मच गया और तत्काल विस्तृत जांच शुरू की गई।

अप्रेजर की भूमिका भी संदेह के घेरे में

जांच में यह भी सामने आया कि इस धोखाधड़ी में केवल ग्राहक ही नहीं, बल्कि गोल्ड अप्रेजर की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है। बैंक आमतौर पर अप्रेजर की रिपोर्ट के आधार पर ही लोन मंजूर करता है, जिसका फायदा उठाकर इस पूरे सिंडिकेट ने ठगी को अंजाम दिया।

दूसरे जिलों तक फैला सिंडिकेट, पुलिस अलर्ट

बैंक की ओर से इस मामले की शिकायत जुलाई 2025 में ही की गई थी, लेकिन विस्तृत जांच के बाद 10 अप्रैल 2026 को एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह कोई एकल मामला नहीं, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट का हिस्सा है, जो अन्य जिलों के बैंकों को भी इसी तरह निशाना बना चुका है।

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