लखनऊ अग्निकांड: पोस्टमार्टम में सामने आई मौत की असली वजह, दम घुटने से हुई थी 15 लोगों की मौत

Edited By Updated: 24 Jun, 2026 07:34 PM

lucknow fire tragedy postmortem reveals the real cause of death 15 people died

राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में गत सोमवार को एक इमारत में आग लगने की घटना में जान गंवाने वाले सभी 15 लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से उनकी मौत होने की पुष्टि हुई है। सूत्रों ने बताया कि किसी भी शव के पोस्टमार्टम में ऐसी कोई गंभीर बाहरी...

लखनऊ: राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में गत सोमवार को एक इमारत में आग लगने की घटना में जान गंवाने वाले सभी 15 लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से उनकी मौत होने की पुष्टि हुई है। सूत्रों ने बताया कि किसी भी शव के पोस्टमार्टम में ऐसी कोई गंभीर बाहरी चोट नहीं पायी गयी है, जिसे सीधे तौर पर मृत्यु का कारण माना जा सके।

PunjabKesari

उन्होंने बताया कि डॉक्टरों को शवों पर बुरी तरह जलने या गहरे घाव के कोई स्पष्ट सुबूत भी नहीं मिले हैं, मगर कई मृतकों के चेहरे और आंखों के आसपास सूजन देखी गई। पोस्टमार्टम करने वाले विशेषज्ञों ने मृतकों की नाक के अंदर कालिख और धुएं के कण भी पाए जिससे यह जाहिर होता है कि मरने से पहले उनके शरीर में काफी मात्रा में धुएं ने प्रवेश किया था और दम घुटने से उनकी मौत हुई।

PunjabKesari

सूत्रों ने बताया कि इन तथ्यों के आधार पर डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला कि आग लगने की घटना में मारे गये सभी 15 लोगों की मौत दम घुटने के कारण हुई है। पोस्टमार्टम करने वाली टीम में शामिल एक वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ''पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि सभी 15 मृतकों की मौत फेफड़ों में अत्यधिक धुआं जाने से चलते दम घुटने के कारण हुई। शरीर पर जलने या बाहरी चोट के ऐसे कोई गंभीर निशान नहीं मिले जिन्हें मौत की सीधी वजह माना जा सके।'' उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान सामने आयी ये जानकारियां जांच अधिकारियों को दे दी गई हैं।

 डॉक्टर ने कहा, ''आग से प्रभावित बंद जगहों पर ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिर सकता है और जहरीली गैसें जमा हो सकती हैं, नतीजतन दम घुटने के हालात बन जाते हैं।'' चिकित्सक ने बताया, ''कई मामलों में अंदर फंसे लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय या मौका नहीं मिल पाता। मरने से पहले धुएं के कारण वे लोग सम्भवत: बेहोश हो गए होंगे।'' वरिष्ठ चिकित्सकों ने बताया कि आग लगने की घटनाओं में अक्सर मौतें आग की लपटों से नहीं, बल्कि धुएं में मौजूद जहरीली गैसों से होती हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी बंद जगह पर धुआं भर जाता है तो ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरता है, जिससे सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने बताया कि प्लास्टिक, फोम और अन्य सिंथेटिक चीजों के जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं जो शरीर के ऑक्सीजन लेने में रुकावट पैदा करती हैं, जिससे कुछ ही समय में इंसान बेहोश हो सकता है और उसकी मौत भी हो सकती है।

गौरतलब है कि राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में गत सोमवार की दोपहर तीन मंजिल की एक इमारत में सोमवार को आग लग गयी थी, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई। जान गंवाने वालों में ज्यादातर लोग युवा थे। सरकार ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिये विशेष अन्वेषण दल गठित किया है, जो एक सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट देगा। 

वहीं, लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इमारत से जुड़े कथित नियमों के उल्लंघन के संबंध में नोटिस जारी किये हैं। सरकार ने जान गंवाने वालों के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा भी की है। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में आग से सुरक्षा के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए शैक्षणिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के निरीक्षण का अभियान शुरू किया गया है। 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!