Edited By Anu Malhotra,Updated: 06 Jan, 2026 07:42 PM

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर जोरदार हलचल देखने को मिली है। अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी और कांग्रेस ने शिंदे गुट को पीछे छोड़ते हुए अनोखा गठबंधन बनाया है। इस नाते बीजेपी अंबरनाथ नगर परिषद में बहुमत हासिल करने की कगार पर है, और शिवसेना (शिंदे...
नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर जोरदार हलचल देखने को मिली है। अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी और कांग्रेस ने शिंदे गुट को पीछे छोड़ते हुए अनोखा गठबंधन बनाया है। इस नाते बीजेपी अंबरनाथ नगर परिषद में बहुमत हासिल करने की कगार पर है, और शिवसेना (शिंदे गुट) इसे अपनी राजनीतिक चुनौती मान रही है।
बीजेपी की तेजश्री करंजुले नगराध्यक्ष पद पर विजयी हुई हैं। बीजेपी के 16, कांग्रेस के 12 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के 4 नगरसेवकों के साथ मिलकर कुल 32 सदस्यों की गठबंधन सीट ने बीजेपी को स्पष्ट बहुमत प्रदान किया।
शिंदे गुट ने इस गठबंधन को 'अभद्र युति' करार दिया है। विधायक बालाजी किनीकर ने कहा कि बीजेपी, जो कभी 'कांग्रेस-मुक्त भारत' का नारा देती थी, अब कांग्रेस के साथ हाथ मिला रही है और इस कदम को शिवसेना के साथ विश्वासघात के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं बीजेपी ने पलटवार किया है। उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटील ने कहा कि अगर शिंदे गुट के साथ सत्ता में बैठा रहता, जो पिछले 25 साल से कथित रूप से भ्रष्टाचार में लिप्त रहा है, तो वही असली 'अभद्र युति' होती। उन्होंने यह भी बताया कि अंबरनाथ नगर परिषद में महायुति के हिस्से में शिवसेना से कई बार बातचीत हुई, लेकिन सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम भी इस राजनीतिक घटनाक्रम को और दिलचस्प बनाते हैं। दिसंबर में हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। महायुति ने कुल 288 नगर परिषद और 207 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। इसके विपरीत, विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी केवल 44 सीटों पर सफल हो सका।
अंबरनाथ की इस नई राजनीतिक चाल ने महाराष्ट्र की सत्ता समीकरणों में एक नई दलील जोड़ दी है। बीजेपी और कांग्रेस का यह गठबंधन अब यह साबित करेगा कि स्थानीय राजनीति में दांव-पेंच कितनी तेजी से बदल सकते हैं।