Edited By Rohini Oberoi,Updated: 12 Aug, 2026 12:04 PM

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से सरकारी योजना में फर्जीवाड़े की कोशिश का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ उठाने के लिए कई महिलाओं ने पहले से शादीशुदा होने के बावजूद दोबारा शादी के लिए आवेदन कर दिया।...
आगरा : उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से सरकारी योजना में फर्जीवाड़े की कोशिश का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ उठाने के लिए कई महिलाओं ने पहले से शादीशुदा होने के बावजूद दोबारा शादी के लिए आवेदन कर दिया। हालांकि जब जिला प्रशासन ने आवेदनों का ऑनलाइन सत्यापन कराया तो इस खेल की पोल खुल गई और करीब 1,000 आवेदनों को अपात्र पाकर तुरंत निरस्त कर दिया गया।
मिली जानकारी के मुताबिक आगरा जिले में इस साल योजना के तहत 1,522 जोड़ों का विवाह कराने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके लिए अप्रैल से 30 जुलाई के बीच 1,201 युवतियों ने आवेदन किया था लेकिन जब जांच प्रक्रिया शुरू हुई तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। 1,201 में से केवल 201 आवेदन ही सही पाए गए जबकि करीब 1000 आवेदन खारिज कर दिए गए। सबसे ज्यादा निरस्त आवेदन बाह, अछनेरा और जैतपुर विकासखंड से हैं।
जांच में पता चला कि कई महिलाओं की शादी 4 से 8 महीने पहले ही हो चुकी थी। शादीशुदा होने के बावजूद योजना की धनराशि पाने के लिए उन्होंने दोबारा आवेदन कर दिया था। इसके अलावा खारिज किए गए आवेदनों में कई लड़कियां नाबालिग पाई गईं तो कुछ के परिवार की सालाना आय योजना के तय मानक (3 लाख रुपए) से अधिक निकली।
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जब इस मामले में कुछ आवेदिकाओं से बात की गई तो उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनका इरादा धोखाधड़ी का नहीं था। अछनेरा की एक आवेदिका ने बताया कि जब उनकी शादी तय हुई थी उस समय योजना के तहत फॉर्म नहीं भरे जा रहे थे। इसलिए मजबूरी में उन्होंने सामान्य तरीके से शादी कर ली। बाद में जब फॉर्म आए तो उन्होंने भी आवेदन कर दिया। महिलाओं की मांग है कि सरकार को ऐसे नियम बनाने चाहिए ताकि हाल ही में शादी करने वाले गरीब परिवार भी इस योजना का लाभ पा सकें।
बता दें कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत पात्र जोड़े को कुल 1 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है। इसमें से 64 हजार रुपए सीधे दुल्हन के बैंक खाते में भेजे जाते हैं 21 हजार रुपए की विवाह सामग्री दी जाती है और 15 हजार रुपए आयोजन के खर्च में इस्तेमाल होते हैं। इसी बड़ी राशि के लालच में फर्जी आवेदनों की होड़ मच गई थी।
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वहीं मामले की जानकारी देते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी नगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के कारण अपात्र आवेदन आसानी से पकड़ में आ गए। वहीं अब लक्ष्य पूरा करने के लिए जिलाधिकारी मनीष बंसल ने पंचायत सचिवों, ग्राम विकास अधिकारियों और BDO को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे गांव-गांव जाकर वास्तविक और पात्र आवेदकों की तलाश करें ताकि नए आवेदन लेकर पारदर्शी तरीके से सामूहिक विवाह का आयोजन कराया जा सके।