आसाराम को मेडिकल बेल देने से इनकार किया, सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका

Edited By Updated: 06 Aug, 2026 01:44 PM

major setback from supreme court asaram denied medical bail

सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में दोषी आसाराम की स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम ज़मानत देने की मांग फिलहाल खारिज कर दी है। हालांकि, अदालत ने उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए उन्हें अपनी पसंद का प्रशिक्षित केयरटेकर 24 घंटे साथ रखने की अनुमति...

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में दोषी आसाराम की स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम ज़मानत देने की मांग फिलहाल खारिज कर दी है। हालांकि, अदालत ने उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए उन्हें अपनी पसंद का प्रशिक्षित केयरटेकर 24 घंटे साथ रखने की अनुमति दी है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने एम्स की मेडिकल रिपोर्ट पर विचार किया। रिपोर्ट में कहा गया कि आसाराम को तत्काल अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उनकी स्थिति ऐसी है कि उन्हें चौबीसों घंटे चिकित्सकीय सहायता की जरूरत पड़ सकती है।

सुझाव का पालन करने को कहा

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केंद्र सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि एम्स की रिपोर्ट में दिए गए सभी सुझावों का पालन किया जाएगा। इसी आधार पर आसाराम को अपनी पसंद का प्रशिक्षित केयरटेकर रखने की अनुमति दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ती है, तो वे दोबारा अंतरिम ज़मानत के लिए अदालत का रुख कर सकते हैं।

विशेषज्ञ की रिपोर्ट

बता दॉ कि 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने एम्स के निदेशक को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित कर आसाराम का विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण कराने का निर्देश दिया था। उसी जांच रिपोर्ट के आधार पर गुरुवार को सुनवाई हुई। यह याचिका उस अपील का हिस्सा है, जिसमें आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने 2013 में जोधपुर में एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखा था।

मामला क्या है?

अभियोजन के अनुसार, अगस्त 2013 में जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न किया गया था। मामले में ट्रायल कोर्ट ने आसाराम के साथ हॉस्टल वार्डन संचिता शिल्पी और स्कूल निदेशक शरद चंद्र को भी दोषी ठहराया था। इसके बाद सभी ने राजस्थान हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।

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