Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 19 Mar, 2026 06:32 PM

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा होते ही प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। चुनाव आयोग के निर्देश पर राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों का व्यापक स्तर पर तबादला कर दिया गया।
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा होते ही प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। चुनाव आयोग के निर्देश पर राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों का व्यापक स्तर पर तबादला कर दिया गया। इस कार्रवाई में मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत 50 से अधिक वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारी प्रभावित हुए हैं।
इन तबादलों को लेकर राज्य सरकार और खासकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस कदम को असामान्य बताते हुए कहा कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले इतने बड़े पैमाने पर ट्रांसफर पहले कभी नहीं हुए।
ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर सीधा हमला
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया और आधिकारिक पत्र के माध्यम से चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे प्रशासन में अनावश्यक हस्तक्षेप करार देते हुए कहा कि इससे राज्य की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ममता ने आरोप लगाया कि कुछ महत्वपूर्ण विभागों जैसे इंटेलिजेंस, एसटीएफ और सीआईडी से जुड़े अधिकारियों को चुन-चुनकर हटाया गया है, जो कई सवाल खड़े करता है।
“राजनीतिक दखल” और “अव्यवस्था” का आरोप
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जिन अधिकारियों को हटाया गया, उन्हें बाद में चुनाव से जुड़े कार्यों में ही लगाया गया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने इसे प्रशासनिक असंतुलन और कन्फ्यूजन का उदाहरण बताया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में मतदाता सूची से जुड़े कार्य अभी अधूरे हैं, जिससे लोगों में असमंजस बना हुआ है।
बीजेपी पर भी साधा निशाना
ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग देते हुए बीजेपी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही संकेत नहीं है। उन्होंने इसे “अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति” बताते हुए कहा कि बंगाल किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा और लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगा।
चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
चुनाव आयोग की इस कार्रवाई और मुख्यमंत्री की तीखी प्रतिक्रिया के बाद राज्य की राजनीति और गर्म हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाजी और राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।