मिल गया Diabetes का पक्का इलाज? AIIMS डॉक्टर ने बताया कैसे छूट सकती है गोलियां

Edited By Updated: 22 Sep, 2026 09:39 AM

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अगर आप या आपका कोई परिचित लंबे समय से टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहा है और ढेरों दवाइयों के बावजूद शुगर कंट्रोल नहीं हो पा रही है, तो चिकित्सा विज्ञान में इसका एक कारगर समाधान मौजूद है। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के विशेषज्ञों...

नई दिल्ली: अगर आप या आपका कोई परिचित लंबे समय से टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहा है और ढेरों दवाइयों के बावजूद शुगर कंट्रोल नहीं हो पा रही है, तो चिकित्सा विज्ञान में इसका एक कारगर समाधान मौजूद है। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के विशेषज्ञों के अनुसार, 'मेटाबॉलिक सर्जरी' के जरिए अनियंत्रित डायबिटीज के मरीजों को बीमारी से बड़ी राहत मिल सकती है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा है कि मेटाबॉलिक सर्जरी से टाइप-2 मधुमेह के चुनिंदा मरीजों को राहत पाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा उचित चिकित्सकीय इलाज के बावजूद बीमारी अनियंत्रित रहने पर भी कई मरीजों में इस सर्जरी के जरिये रक्त शर्करा को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। 

सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ मारुति ने कहा कि इस प्रक्रिया को मधुमेह से पीड़ित हर व्यक्ति के इलाज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन मरीजों के लिए एक साक्ष्य-आधारित विकल्प के रूप में देखा जाना चाहिए जिनकी रक्त शर्करा दवाइयों और जीवनशैली में बदलाव के बावजूद अनियंत्रित रहती है। डॉ. मंजूनाथ ने कहा, "कुछ मरीजों के लिए दवाइयां और जीवनशैली में बदलाव ही काफी होंगे। कुछ के लिए, उचित मेडिकल थेरेपी के बावजूद मधुमेह अनियंत्रित रहेगी। 

इन मरीजों में, मेटाबॉलिक सर्जरी बीमारी से राहत पाने का एक अवसर प्रदान कर सकती है, और कुछ में बहुत बेहतर ग्लाइसेमिक (रक्त शर्करा) नियंत्रित कर सकती है।" उन्होंने कहा कि मेटाबॉलिक सर्जरी पर तब विचार किया जा सकता है जब किसी मरीज का एचबीए1सी (औसत रक्त शर्करा का एक माप) तीन से अधिक मौखिक (ओरल) एंटी-डायबिटिक दवाओं के जरिये इलाज के बावजूद 7.5 प्रतिशत से ऊपर बना रहता है। 

मंजूनाथ ने कहा कि मरीज को कम से कम दो साल से टाइप-2 मधुमेह भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्जरी पर तब भी विचार किया जा सकता है जब मरीज को इंसुलिन की सलाह दी गई हो या इंसुलिन शुरू किया गया हो क्योंकि दवाइयां रक्त शर्करा को नियंत्रित करने के लिए अब पर्याप्त नहीं हैं। मंजूनाथ ने कहा कि मेटाबॉलिक सर्जरी की शुरुआती लागत की तुलना अनियंत्रित मधुमेह के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और आर्थिक बोझ से की जानी चाहिए। 

उन्होंने कहा, "कोई भी इलाज यह गारंटी नहीं दे सकता कि जटिलताएं कभी नहीं होंगी। लेकिन मेटाबॉलिक सर्जरी के बाद मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में निरंतर सुधार के जरिये मधुमेह और इसकी जटिलताओं के दीर्घकालिक बोझ को कम किया जा सकता है।"   
 


  

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