कमाल हैं भारतीय सेना एवं रक्षा मंत्रालय के यह वरिष्ठ सलाहकार, विश्व की सर्वाधिक शैक्षणिक डिग्रियां व 11 वर्ल्ड रिकॉर्ड किए हासिल

Edited By Updated: 12 Apr, 2026 11:52 AM

most educationally qualified person 138 degrees diplomas and certificates

राजस्थान के डॉ. दशरथ सिंह ने 138 डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाणपत्र हासिल कर विश्व रिकॉर्ड बनाया है। साधारण किसान परिवार से निकलकर सेना में सेवा देते हुए उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। आज वे शिक्षा, सेना और कानून तीनों क्षेत्रों में मिसाल बन चुके हैं।

International Desk: आम तौर पर लोग एक या दो डिग्री हासिल कर संतुष्ट हो जाते हैं लेकिन यदि किसी व्यक्ति के अंदर पढ़ाई का ऐसा जुनून हो कि उसने पास 138 डिग्री, डिप्लोमा एवं प्रमाणपत्र हों तो ऐसे व्यक्ति को आप क्या कहना पसंद करेंगे। यह कारनामा राजस्थान में झुंझुनूं जिले के डॉ. दशरथ सिंह ने कर दिखाया है। हाल में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के 39वें दीक्षांत समारोह में डॉ. दशरथ सिंह को 138वीं डिग्री प्रदान की गई। उन्होंने 'वैदिक अध्ययन में परास्नातक' की डिग्री 'विशिष्ट योग्यता' के साथ हासिल की। वह शिक्षा के क्षेत्र में 11 विश्व रिकॉर्ड बना चुके हैं। दशरथ वर्तमान में भारतीय सेना एवं रक्षा मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार हैं। सेना की नौकरी के दौरान पंजाब, जम्मू-कश्मीर, असम जैसे अपेक्षाकृत 'कठिन' इलाकों में तैनाती के बावजूद दशरथ में पढ़ाई का जुनून कम नहीं हुआ

 

। सेना की नौ राजपूताना रेजिमेंट में सिपाही रहे दशरथ सिंह का नाम 'इंरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में 'मोस्ट एजुकेशनली क्वालिफाइड पर्सन ऑफ द वर्ल्ड' यानी विश्व के सबसे ज्यादा शैक्षणिक योग्यता रखने वाले व्यक्ति के रूप में दर्ज है। डॉ. दशरथ सिंह अब तक तीन विषयों में पीएचडी, सात में स्नातक, 46 में स्नातकोत्तर, 23 में डिप्लोमा, सेना से संबंधित सात विषयों में डिग्री और 52 विषयों में प्रमाणपत्र हासिल कर चुके हैं। राजस्थान से सबसे ज्यादा सैनिक देने वाले झुंझुनूं जिले की नवलगढ़ तहसील के खिरोड़ गांव में एक साधारण से किसान एवं सैनिक परिवार में जन्मे दशरथ अपने परिवार से तीसरी पीढ़ी के सैनिक हैं। उन्होंने बताया कि उनका बचपन बेहद कष्टमय और कठिन परिस्थितियों में गुजरा। दशरथ ने कहा, "मेरे परिवार में कोई पढ़ा लिखा नहीं था और न ही पढ़ाई-लिखाई का कोई माहौल ही था, फिर भी गांव के एक छोटे से विद्यालय से अपनी प्रारंभिक शिक्षा का सफर शुरू किया। मैंने 10वीं तक की शिक्षा गांव के ही सरकारी विद्यालय से पूरी की।

 

घर की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण महाविद्यालय की पढ़ाई करना एक सपने जैसा था। फिर एक दिन कुछ दोस्तों के साथ मैंने घर से 13 किमी दूर स्थित सेठ जीबी पोद्दार महाविद्यालय नवलगढ़ में प्रवेश ले लिया।" उन्होंने कहा, "फीस और किताबों के अभाव में महाविद्यालय से मेरा नाम काट दिया गया था लेकिन मैंने महाविद्यालय प्राचार्य से निवेदन किया तो मुझे 10 दिन का समय दिया गया। उस समय मैं अपने खेत में उपजी सब्जियां शहर की मंडी में बेचने 13 किमी पैदल गया और उससे मिले पैसे से फीस जमा कराई।" उन्होंने बताया कि उनके दादा बाघ सिंह और पिता रघुवीर सिंह शेखावत भी सेना में थे। कॉलेज में प्रथम वर्ष के बाद ही चार अक्टूबर 1988 को वह भारतीय सेना की 9वीं राजपूत इन्फेंट्री बटालियन में बतौर एक साधारण सिपाही भर्ती हो गए। दशरथ सिंह ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि उन्हें पहली तैनाती 1989 में पंजाब में मिली थीं। इसके बाद वह उल्फा आंदोलन के दौरान 1991 में असम में रहे।

 

इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय राइफल्स के पहले जत्थे में शामिल कर 1994 में जम्मू-कश्मीर भेज दिया गया जहां वह साढ़े तीन साल रहे। उन्होंने बताया कि लगातार फील्ड ड्यूटी के बाद उन्हें कुछ समय के लिए लखनऊ भेजा गया, लेकिन इसी दौरान संसद पर हमला हुआ तो उन्हें वापस जम्मू कश्मीर भेज दिया गया। सिंह ने बताया कि बाद में वह कारगिल युद्ध में शामिल रहे। सिंह तीन जुलाई 2004 को सेवानिवृत्ति के बाद, वर्तमान में सेना में बतौर विधि सलाहकार के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें सेना में रहते हुए भी यह कसक रही कि वह पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए इसलिए उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद पढ़ाई शुरू की। दशरथ ने बताया कि उन्होंने पहली डिग्री 'बैचलर ऑफ कॉमर्स' की ली तथा एलएलबी, एलएलएम, बीजेएमसी और बीएड की डिग्री नियमित छात्र के रूप में ली है। उन्होंने बाकी डिग्री और डिप्लोमा इग्नू, जैन विश्व भारती लाडनूं और कुछ निजी विश्वविद्यालयों से प्राप्त की हैं।

 

दशरथ का दावा है कि वे अब तक हजारों परीक्षाएं दे चुके हैं। दशरथ ने कहा, "सेना में दो महीने की छुट्टी हर साल मिलती है। मैं यह छुट्टी मई-जून में ही लेता था। नौकरी के दौरान कभी होली-दिवाली या अन्य त्योहारों के लिए छुट्टी नहीं ली। सेवानिवृत्ति के बाद फिर सरकारी नौकरी मिली, लेकिन लगा कि सैनिकों के लिए कुछ करना चाहिए इसलिए मैंने कानून की डिग्री हासिल कर वकालत शुरू कर दी। अब जयपुर में सेना की सप्तशक्ति कमांड में विधि सलाहकार के रूप में सेना, सैनिकों और पूर्व सैनिकों से जुड़े मामले देखता हूं।" उन्होंने दावा किया है कि वह अब तक सैनिकों के 2,500 मामले लड़ चुके हैं और ज्यादातर में सफलता हासिल की है। दशरथ के नाम शिक्षा के क्षेत्र में 11 रिकॉर्ड हैं, जिनमें 'इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', दो 'हॉवर्ड बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', 'एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', 'इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड', 'यूएसए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', 'लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', 'यूएन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', 'ग्लोबल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' और 'नेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' शामिल हैं।  

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