Edited By Anu Malhotra,Updated: 19 Jan, 2026 09:56 AM

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश के युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए एक शानदार पहल की है। मुख्यमंत्री ने 12 जनवरी को 'मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना' का आगाज किया है, जिसका मुख्य लक्ष्य राज्य के एक लाख युवाओं को खुद का मालिक बनाना है। इस...
नेशनल डेस्क: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश के युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए एक शानदार पहल की है। मुख्यमंत्री ने 12 जनवरी को 'मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना' का आगाज किया है, जिसका मुख्य लक्ष्य राज्य के एक लाख युवाओं को खुद का मालिक बनाना है। इस योजना के जरिए सरकार युवाओं को बिना किसी ब्याज के पैसा देगी ताकि वे अपना नया काम शुरू कर सकें और दूसरों को भी नौकरी दे सकें। उद्योग विभाग ने इसके लिए जरूरी नियम तय कर दिए हैं और जल्द ही इंटरनेट के जरिए इसके फॉर्म भरने शुरू हो जाएंगे।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि युवाओं को 10 लाख रुपये तक का कर्ज बिना किसी ब्याज के मिलेगा। इसका मतलब है कि कर्ज पर लगने वाला सारा ब्याज खुद सरकार भरेगी। इसके साथ ही, कारोबार शुरू करने में मदद के लिए सरकार 50 हजार रुपये तक की शुरुआती आर्थिक मदद (मार्जिन मनी) भी देगी और लोन की गारंटी से जुड़ी फीस भी खुद चुकाएगी। इस पैसे का इस्तेमाल युवा अपनी छोटी फैक्ट्री लगाने, दुकान खोलने या किसी भी तरह की सर्विस का काम शुरू करने के लिए कर सकते हैं।
योजना का फायदा पढ़ाई के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। जो युवा 8वीं से 12वीं कक्षा तक पढ़े हैं, उन्हें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए साढ़े सात लाख और दुकान या सर्विस के काम के लिए साढ़े तीन लाख रुपये तक की मदद मिलेगी। वहीं, जिन युवाओं ने कॉलेज की पढ़ाई की है या आईटीआई (ITI) जैसा कोई प्रोफेशनल कोर्स किया है, उन्हें अपनी फैक्ट्री लगाने के लिए 10 लाख और अन्य कामों के लिए 5 लाख रुपये तक का ऋण मिल सकेगा। यह योजना राजस्थान के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा अवसर लेकर आई है।