Edited By Tanuja,Updated: 01 Feb, 2026 03:24 PM

नेपाल में चुनाव से पहले पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खड़े एक रहस्यमय प्राइवेट जेट ने हलचल मचा दी है। जेट से जुड़े ब्रिटिश बिज़नेसमैन लॉर्ड अशक्रॉफ्ट की मौजूदगी, चीन के प्रभाव और केपी ओली से नज़दीकियों ने नेपाल की राजनीति में “अदृश्य हस्तक्षेप” की...
Kathmandu: नेपाल के चुनाव से पहले भारत के पूर्व रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) एजेंट और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो रह चुके लक्ष्मण उर्फ लकी बिष्ट (Lucky Bisht) के वीडियो ने भूचाल सनसनी फैला दी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे Lucky Bisht के इस वीडियो के अनुसार नेपाल में 5 मार्च 2026 को होने जा रहे आम चुनावों से ठीक पहले एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा और राजनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लकी बिष्ट के अमुसार 28 जनवरी 2026 से पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खड़ा एक प्राइवेट ब्लैक जेट न केवल रहस्य बना हुआ है, बल्कि चौंकाने वाली बात यह है कि नेपाल सरकार के पास इस विमान के आगमन और ठहराव की कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यह वही पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जिसे चीन की मदद से बनाया गया और जिस पर तकनीकी, ऑपरेशनल और सुरक्षा स्तर पर बीजिंग के प्रभाव को लेकर पहले से ही विवाद रहा है। ऐसे एयरपोर्ट पर एक अज्ञात जेट का हफ्तों तक खड़ा रहना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है।
पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर बहस
पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर पहले से ही यह बहस जारी रही है कि इसके संचालन और तकनीकी नियंत्रण में चीन की भूमिका अत्यधिक है। ऐसे में इस एयरपोर्ट पर एक अज्ञात प्राइवेट जेट की लंबी मौजूदगी ने सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े सवालों को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इसी जेट के जरिए ब्रिटेन के प्रभावशाली बिज़नेसमैन लॉर्ड माइकल अशक्रॉफ्ट नेपाल पहुंचे हैं। लॉर्ड अशक्रॉफ्ट को केवल उद्योगपति कहना कई विश्लेषकों के अनुसार अधूरी तस्वीर पेश करता है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि उनका नाम अतीत में कई देशों में सत्ता परिवर्तन, चुनावी रणनीतियों और लॉबिंग गतिविधियों से जोड़ा जाता रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।नेपाल में उनकी मौजूदगी इसलिए भी संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि इस समय उनकी नज़दीकियाँ पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से बताई जा रही हैं। ओली को हालिया जनादेश में सत्ता से बाहर किया जा चुका है, लेकिन आगामी चुनाव में उनकी वापसी की संभावनाओं पर चर्चाएँ तेज़ हैं।

संयोग या सत्ता का खेल?
राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि वर्ष 2000 के आसपास नेपाल में सत्ता संतुलन बदलने के दौर में भी लॉर्ड अशक्रॉफ्ट का नाम अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में उभरा था। अब एक बार फिर चुनाव से ठीक पहले उनकी सक्रियता को महज़ संयोग मानने को कई लोग तैयार नहीं हैं। इन घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या नेपाल की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के पीछे कोई अदृश्य अंतरराष्ट्रीय खेल खेला जा रहा है? और क्या चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच नेपाल एक बार फिर वैश्विक शक्तियों की रणनीतिक शतरंज बनता जा रहा है?नेपाल सरकार की ओर से अब तक इस पूरे मामले पर कोई स्पष्ट और विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बनाती है पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से अशक्रॉफ्ट की कथित नज़दीकी। ओली वही नेता हैं जिन्हें नेपाल की जनता सत्ता से बाहर कर चुकी है, लेकिन जो चुनाव से पहले फिर से सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।

सवाल क्या हैं?
- ▪ ब्लैक जेट की एंट्री किसकी अनुमति से?
- ▪ सरकार अनजान कैसे?
- ▪ चीन के प्रभाव वाले एयरपोर्ट पर इतनी ढील क्यों?
- ▪ चुनाव से ठीक पहले विदेशी पावर-ब्रोकर की मौजूदगी क्यों?
परत-दर-परत कहानी
- 2000: नेपाल में सत्ता परिवर्तन के दौर में लॉर्ड अशक्रॉफ्ट का नाम अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में उभरा
- 2015–2022: चीन का नेपाल में बुनियादी ढाँचे और राजनीति में प्रभाव तेज़
- 2023–2024: पोखरा एयरपोर्ट पर चीनी नियंत्रण को लेकर चेतावनियाँ
- 28 जनवरी 2026: रहस्यमय ब्लैक जेट पोखरा एयरपोर्ट पर उतरा
- 5 मार्च 2026: नेपाल में आम चुनाव सबसे संवेदनशील मोड़
भारत के लिए टेंशन क्यों
भारत के लिए नेपाल सिर्फ पड़ोसी नहीं, रणनीतिक सुरक्षा की पहली दीवार है। चीन पहले ही नेपाल में इन्फ्रास्ट्रक्चर, राजनीतिक संपर्क, एयरपोर्ट और डिजिटल सिस्टम के ज़रिये गहरी पैठ बना चुका है। ऐसे में एक ब्रिटिश पावर-ब्रोकर की मौजूदगी यह संकेत देती है कि नेपाल अब सिर्फ चीन-भारत का नहीं, बल्कि वैश्विक शक्तियों का प्रयोगशाला राज्य बनता जा रहा है।विश्लेषकों का मानना है कि अगर नेपाल की चुनावी प्रक्रिया पर विदेशी प्रभाव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर भारत की उत्तरी सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ेगा। नेपाल की उत्तरी सीमा चीन से लगती है और दक्षिण में भारत। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन नेपाल को भारत के खिलाफ रणनीतिक बफर के रूप में देखता है। डिजिटल निगरानी, सर्विलांस सिस्टम और सीमा क्षेत्रों में चीनी मौजूदगी भारत के लिए सीधी चिंता है।
नेपाल में चीन का दखल किस हद तक
यह सवाल अभी नेपाल की राजनीति, सुरक्षा और संप्रभुता का सबसे बड़ा मुद्दा है। नेपाल में चीन का दखल अब केवल सड़क, पुल और बिजली परियोजनाओं तक सीमित नहीं रह गया है। पिछले एक दशक में बीजिंग ने नेपाल में आर्थिक, राजनीतिक, रणनीतिक और संस्थागत स्तर पर ऐसी पैठ बनाई है, जिसे विशेषज्ञ “सॉफ्ट ऑक्युपेशन” करार दे रहे हैं। नेपाल पर चीनी कर्ज़ लगातार बढ़ा है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि चीन का मॉडल “पहले कर्ज़, फिर शर्तें” पर आधारित है, जिससे नीति-निर्धारण पर दबाव बनता है। नेपाल के कई राजनीतिक दलों और नेताओं के साथ चीन के सीधे संपर्क रहे हैं।