Edited By Tanuja,Updated: 30 Jan, 2026 02:06 PM

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, युद्ध, महंगाई और सप्लाई-चेन संकट के बीच भारत का बजट 2026 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद अहम माना जा रहा है। IMF-World Bank सहित वैश्विक संस्थाएं भारत से स्थिरता, निवेश और विकास को नई दिशा देने की उम्मीद कर रही हैं।
International Desk: यूक्रेन-रूस युद्ध, गाजा संकट, लाल सागर में तनाव, चीन की धीमी अर्थव्यवस्था और अमेरिका-यूरोप में ऊंची ब्याज दरों के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था डगमगाई हुई है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब भारत के बजट 2026 पर टिकी हैं, जिसे वैश्विक संस्थाएं आने वाले वर्षों की आर्थिक दिशा तय करने वाला मान रही हैं। IMF और World Bank की ताजा रिपोर्टों के अनुसार 2026 में वैश्विक विकास दर 2.7-3% के आसपास रहने की संभावना है। यूरोप ऊर्जा संकट और युद्ध के असर से जूझ रहा है जबकि चीन रियल एस्टेट और डिमांड संकट में है।
वैश्विक उद्योगों की भारत से उम्मीदें क्यों
वैश्विक स्तर पर टैरिफ नीतियाँ और निर्यात मांग में गिरावट जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अमेरिकी टैरिफों और निर्यात बाधाओं से भारतीय निर्यातकों को दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिसके समाधान की उम्मीद उद्योगों को बजट से है।पहले World Bank ने भारत की ग्रोथ अनुमान को थोड़ा कम कर 6.3% कर दिया था, यह वैश्विक आर्थिक दबाव और घरेलू नीतिगत अनिश्चितताओं को ध्यान में रखकर किया गया था। हालांकि संशोधन में यह स्वीकार किया गया कि भारत दक्षिण एशिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और घरेलू खपत तथा सेवा निर्यात इसे आगे ले जा रहे हैं।
- अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और निवेशक भारत के बजट 2026 से उम्मीद कर रहे हैं।
- IMF ने भारत के लिए 2025-26 के GDP अनुमान को 6.6% तक अपग्रेड किया है।
- यह दिखाता है कि वास्तव में भारत वैश्विक मंदी के बीच भी प्रगति कर रहा है।
- मैन्युफैक्चरिंग और Make in India को टैक्स प्रोत्साहन।
- सेमीकंडक्टर, EV, ग्रीन एनर्जी में सब्सिडी।
- स्टेबल टैक्स पॉलिसी और आसान निवेश नियम।
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI पर खर्च।
- Bloomberg और Reuters के अनुसार, बजट के फैसले तय करेंगे कि ग्लोबल सप्लाई चेन चीन से भारत की ओर कितनी तेजी से शिफ्ट होती है।
रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक असर
- NATO और एशिया-पैसिफिक में बढ़ते तनाव के बीच भारत के डिफेंस बजट में बढ़ोतरी पर दुनिया की नजर।
- स्वदेशी हथियार और रक्षा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
- इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च से लॉजिस्टिक्स और व्यापार मजबूत होगा
- विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का बजट इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगा।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत के लिए चुनौती
- मुनाफे में फॉरेन इन्वेस्टमेंट फंड (FII) आउटफ्लो और रुपया की कमजोरी ने भी भारत के लिए विनिमय दर संबंधी जोखिम पैदा कर दिए हैं, जिससे बजट में पूंजी आकर्षण और निवेश-सहायक उपायों की मांग बढ़ी है।
- चीन सस्ता उत्पादन केंद्र बना हुआ है।
- वियतनाम, बांग्लादेश और मैक्सिको प्रतिस्पर्धा में शामिल।
- भारत को स्किल, लॉजिस्टिक्स और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर तेज सुधार जरूरी।