मलेशिया में भावुक मुलाकातः INA दिग्गज जयराज राजा ने PM मोदी को बताया “महान”, कहा-आपने भारत को नई ऊंचाई पर पहुँचाया

Edited By Updated: 09 Feb, 2026 12:42 PM

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INA के दिग्गज जयराज राजा राव ने कुआलालंपुर में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को “प्रेरणादायक” बताया और उनकी प्रशंसा की। उन्होंने मोदी के सामाजिक कार्य, समानता नीति और पाकिस्तान के खिलाफ मजबूत रुख की तारीफ की। राव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान...

International Desk: इंडियन नेशनल आर्मी (INA) के दिग्गज जयराज राजा राव ने सोमवार को कुआलालंपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात को याद किया और उन्हें “महान” बताते हुए उनकी प्रशंसा की। जयराज राजा राव ने बातचीत में कहा कि मोदी ने भारत की छवि को कई क्षेत्रों में ऊँचा उठाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दो-दिवसीय आधिकारिक दौरे के दौरान रविवार को INA के दिग्गजों से मुलाकात की, जिसमें उन्होंने इस सेना के ऐतिहासिक महत्व और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय डायस्पोरा के बीच इसके स्थायी प्रभाव को रेखांकित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने INA के दिग्गज जयराज राजा राव से भी मुलाकात की और इसे “गहन रूप से प्रेरणादायक” बताया।INA का ऐतिहासिक महत्व आज के मलेशिया और सिंगापुर में भारतीय डायस्पोरा से जुड़ा है, क्योंकि यह सेना मुख्यतः इसी क्षेत्र में संगठित और विकसित हुई थी। इसके भीतर रानी झाँसी रेजिमेंट, एक महिला इकाई, विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिसमें कई भारतीय महिलाएँ शामिल थीं जिन्होंने कभी भारत नहीं देखा था, लेकिन भारतीय संस्कृति और विरासत के साथ गहरा जुड़ाव बनाए रखा।

 

जयराज राजा राव ने IANS को बताया कि वे भावुक स्वभाव के हैं और उन्हें इस बात पर गर्व है कि उन्हें भारत के एक महान प्रधानमंत्री से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने मोदी को एक “ऊर्जावान और परवाह करने वाली” शख्सियत बताया और कहा कि उन्होंने भारत के गांवों में शौचालय, जल व्यवस्था और उनकी रखरखाव जैसी कई सामाजिक योजनाओं पर काम किया है। साथ ही उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की तारीफ भी की। राव ने यह भी कहा कि मोदी ने सभी समुदायों मुस्लिम, हिंदू, ईसाई को बराबरी का दर्जा दिया और पाकिस्तान की उकसावे वाली हरकतों के खिलाफ भी मजबूत रुख अपनाया। उन्होंने अमेरिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका “उकसावे वाला, साम्राज्यवादी और अत्यधिक दबंग” है, और भारत ने उसकी नीतियों से दूरी बनाए रखकर संतुलन बनाए रखा है।

 

जयराज राजा राव ने कहा कि उनके लिए यह मुलाकात भावनात्मक रूप से बहुत भारी थी क्योंकि प्रधानमंत्री ने “एक साधारण व्यक्ति” से मिलने के लिए समय निकाला। उन्होंने बताया कि इस मुलाकात का साझा विषय नेताजी सुभाष चंद्र बोस था। राव ने कहा कि नेताजी ने उन्हें तब गले से लगाया था जब वे मात्र 12–13 वर्ष के थे, और प्रधानमंत्री भी नेताजी के प्रति बहुत आदर रखते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे “मलेशियाई भारतीय” नहीं बल्कि “भारतीय-मलेशियाई” हैं, और वे भारतीय होने पर गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने लोकतांत्रिक देश में कई जातीय भारतीयों को एक साथ बनाए रखा यह एक शानदार उपलब्धि है। राव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के तीन प्रमुख गुणों को अपने जीवन पर गहरा प्रभाव डालने वाला बताया। पहला, नेताजी की भाषा और आकर्षक ऊर्जा ने भारतीयों को एकजुट किया, जिससे लोग अपनी भाषा या क्षेत्र से ऊपर उठकर “पहले हम भारतीय हैं” की भावना से जुड़ सके।

 

दूसरा, नेताजी ने ब्रिटिशों से लड़ने के लिए सशस्त्र संघर्ष और सेना की भूमिका पर जोर दिया, जो गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांत से अलग था। तीसरा, नेताजी ने महिलाओं की बराबरी पर दृढ़ विश्वास रखा और महिलाओं को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया, जिसके तहत मलेशिया में रानी झाँसी रेजिमेंट जैसी इकाई की स्थापना की गई। राव ने यह भी चिंता जताई कि भारतीय राष्ट्रीय सेना के योगदान को भारत या डायस्पोरा में पर्याप्त मान्यता नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि INA ने न केवल प्रतिरोध संगठित किया बल्कि बर्मा तक जाकर भारत की मुक्ति के लिए जमीनी स्तर पर लड़ने की योजना बनाई थी।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए लिखा कि यह बहुत खास था। उन्होंने राव की “बहादुरी और बलिदान” की प्रशंसा की और कहा कि INA के सैनिकों ने भारत की दिशा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और INA के सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारत हमेशा उनका ऋणी रहेगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 1943 में दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय राष्ट्रीय सेना का नेतृत्व संभाला और जर्मनी से आकर इसे पुनर्गठित किया। उन्होंने सिंगापुर और मलेशिया से आधार बनाकर INA का विस्तार किया और भारतीय नागरिकों व युद्धबंदियों को सेना में शामिल कर आंदोलन को मजबूत किया। 21 अक्टूबर 1943 को उन्होंने आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना भी की, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन में प्रतीकात्मक भूमिका निभाई।

 

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