Edited By Tanuja,Updated: 31 Jan, 2026 02:26 PM

विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाएल अव्वाद ने कहा कि भारत और अरब दुनिया के रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि 5,000 वर्षों पुराने व्यापार, ज्ञान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर आधारित हैं। भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक इन ऐतिहासिक संबंधों को नई रणनीतिक दिशा...
International Desk: विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाएल अव्वाद ने भारत और अरब दुनिया के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों सभ्यताओं के रिश्ते केवल आधुनिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि 5,000 वर्षों के व्यापार, अर्थव्यवस्था और ज्ञान के आदान-प्रदान पर आधारित हैं। नई दिल्ली में बोलते हुए अव्वाद ने कहा कि अरब जगत की भौगोलिक संरचना भारत के साथ उसके संबंधों को और मजबूत बनाती है। उन्होंने बताया कि उत्तरी अफ्रीका में 11 अरब देश, जबकि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में 11 अरब देश स्थित हैं, जिनके भारत के साथ साझा रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हुए हैं।
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उन्होंने कहा,“हम भारत के साथ संबंधों को केवल समकालीन स्तर पर नहीं देखते। वास्तव में, भारतीय और अरब सभ्यताओं के बीच पांच सहस्राब्दी पुराने व्यापारिक, आर्थिक और बौद्धिक संबंध रहे हैं।”वाएल अव्वाद ने भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक को बेहद अहम बताते हुए कहा कि यह शिखर सम्मेलन इस बात का संकेत है कि भारतीय सरकार अरब दुनिया को कितना महत्वपूर्ण साझेदार मानती है। उन्होंने 2014 के बाद भारत-अरब संबंधों में आए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अरब देशों के साथ संबंधों को अभूतपूर्व ऊंचाई तक पहुंचाया है। इसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री को उनके दौरे के दौरान लगभग हर अरब देश में सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज़ा गया।
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अव्वाद ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व के बीच बना आपसी विश्वास भारत को अरब दुनिया के सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक बनाता है। गौरतलब है कि भारत-अरब विदेश मंत्रियों की यह बैठक 10 वर्षों के अंतराल के बाद हो रही है। इससे पहले पहली बैठक 2016 में बहरीन में आयोजित की गई थी, जहां सहयोग के पाँच प्रमुख क्षेत्र तय किए गए थे अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति। यह मंच भारत और अरब देशों के बीच सहयोग का सबसे उच्च संस्थागत ढांचा है, जिसे मार्च 2002 में भारत और लीग ऑफ अरब स्टेट्स के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के जरिए औपचारिक रूप दिया गया था। इसके बाद 2008 में अरब-भारत सहयोग मंच की स्थापना के लिए समझौता हुआ, जिसे 2013 में पुनर्गठित किया गया। भारत वर्तमान में लीग ऑफ अरब स्टेट्स का पर्यवेक्षक (Observer) है, जिसमें 22 अरब देश सदस्य हैं।