Edited By Anu Malhotra,Updated: 24 Feb, 2026 01:39 PM

शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा और साहसिक कदम उठाते हुए NCERT (National Council of Educational Research and Training) ने कक्षा 8 के सोशल साइंस सिलेबस में बड़ा फेरबदल किया है। अब स्कूली छात्र केवल किताबी न्याय व्यवस्था ही नहीं पढ़ेंगे, बल्कि अदालतों की...
नेशनल डेस्क: शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा और साहसिक कदम उठाते हुए NCERT (National Council of Educational Research and Training) ने कक्षा 8 के सोशल साइंस सिलेबस में बड़ा फेरबदल किया है। अब स्कूली छात्र केवल किताबी न्याय व्यवस्था ही नहीं पढ़ेंगे, बल्कि अदालतों की दहलीज पर खड़ी उन चुनौतियों को भी समझेंगे, जो अक्सर बंद कमरों की चर्चा का विषय होती थीं। नई पाठ्यपुस्तक में पहली बार 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' जैसे संवेदनशील विषय को एक अलग खंड के रूप में शामिल किया गया है।
क्या बदल गया पुरानी और नई किताब में?
अब तक छात्र केवल यह पढ़ते आए थे कि न्यायपालिका की भूमिका क्या है, अदालतें कैसे काम करती हैं और एक आम नागरिक वहां तक कैसे पहुंच सकता है। पुरानी किताबों में 'न्याय में देरी' का जिक्र तो था, लेकिन 'भ्रष्टाचार' शब्द से परहेज किया गया था। अब NCERT ने साफ तौर पर स्वीकार किया है कि न्याय के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, जजों की कमी, पेचीदा कानूनी प्रक्रियाएं और बुनियादी सुविधाओं का अभाव कैसे न्याय की राह में रोड़ा बनते हैं, इसे भी विस्तार से समझाया गया है।
जवाबदेही और शिकायतों का लेखा-जोखा
इस नए अध्याय में केवल कमियों का ही जिक्र नहीं है, बल्कि आंकड़ों के जरिए हकीकत बयां की गई है। किताब बताती है कि साल 2017 से 2021 के बीच सिस्टम को न्यायपालिका से जुड़ी 1,600 से अधिक शिकायतें मिलीं। छात्र अब यह भी पढ़ेंगे कि अगर किसी जज पर गंभीर आरोप लगते हैं, तो उन्हें पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है। 'महाभियोग' जैसे कड़े प्रावधानों और आरोपी न्यायाधीश को अपना पक्ष रखने के अधिकारों के बारे में भी अब 8th Class के बच्चे गहराई से जान सकेंगे।
गरीबों के लिए न्याय की लड़ाई होगी और कठिन
शिक्षा परिषद ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का सबसे बुरा असर समाज के गरीब और वंचित वर्ग पर पड़ता है। 'न्याय में देरी, न्याय से वंचित होना' (Justice Delayed is Justice Denied) की कहावत को अब मौजूदा हालातों से जोड़कर पेश किया गया है। यह बदलाव छात्रों को बचपन से ही देश की न्याय प्रणाली के प्रति एक आलोचनात्मक और जागरूक नजरिया विकसित करने में मदद करेगा।