ईरान पर हमले को आए अमेरिकी  एयरक्राफ्ट के बुरे हाल ! दुनिया के सबसे आधुनिक-महंगे जहाज के टॉयलेट जाम, ऑपरेशनल तैयारियों पर उठे सवाल

Edited By Updated: 24 Feb, 2026 04:53 PM

toilet war on us warship amid iran tensions raises a stink

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford पर सीवेज सिस्टम फेल होने से टॉयलेट बार-बार जाम हो रहे हैं और क्रू को 45 मिनट तक लाइन में लगना पड़ रहा है। लंबी तैनाती से नाविकों में नाराज़गी बढ़ी है। जहाज ग्रीस के सौडा बे पहुंचा है, मरम्मत के बाद पश्चिम...

Washington: दुनिया के सबसे आधुनिक और महंगे एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford (CVN-78) पर इन दिनों गंभीर सीवेज समस्या सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार पतले पाइप और तकनीकी खामियों के कारण टॉयलेट बार-बार जाम हो रहे हैं, जिससे नाविकों को 45 मिनट या उससे अधिक समय तक लाइन में लगना पड़ रहा है। अमेरिकी अखबार The Wall Street Journal की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह समस्या जनवरी से चल रही है, जब जहाज कैरिबियन क्षेत्र में तैनात था।ताज़ा जानकारी के अनुसार, USS Ford ग्रीस के Souda Bay स्थित क्रीट नेवल बेस पहुंचा है। यहां जहाज की मुरम्मत, सप्लाई रीफिल और क्रू को आराम देने की योजना है। मुरम्मत के बाद यह कैरियर पश्चिम एशिया की ओर रवाना होगा और इज़रायल के समर्थन में पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात किया जा सकता है।
 

यह कैरियर अमेरिकी ताकत का प्रतीक माना जाता है और इसे अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। लेकिन बुनियादी सफाई व्यवस्था में आई खामी ने इसकी ऑपरेशनल तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लगातार जाम की वजह से सीवेज सिस्टम बार-बार फेल हो रहा है, जिससे जहाज पर सवार लगभग 5000 क्रू मेंबर्स की दिनचर्या और मनोबल प्रभावित हो रहा है। रिटायर्ड रियर एडमिरल मार्क मोंटगोमरी के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में कैरियर की तैनाती छह महीने की होती है। लेकिन फोर्ड के नाविक पहले ही आठ महीने से घर से दूर हैं और तैनाती 11 महीने तक बढ़ सकती है।

 

कई नाविक अपने परिवार से महीनों से नहीं मिले हैं। कुछ अपने बच्चों के जन्म, जन्मदिन या अंतिम संस्कार जैसे अहम मौकों पर भी शामिल नहीं हो पाए।कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन डेविड स्कारोसी ने परिवारों को लिखे पत्र में इस “एक्सटेंशन के दर्द” को स्वीकार किया। USS Ford पर सवार अधिकांश नाविक 20-25 वर्ष के युवा हैं। संवेदनशील मिशन के कारण उन्हें सीमित संचार की अनुमति है। सोशल मीडिया और इंटरनेट से दूरी ने उनके मानसिक दबाव को और बढ़ाया है।विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी समस्याओं के साथ-साथ लंबी तैनाती भी मनोबल पर गहरा असर डाल रही है।


 

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