Edited By Sanjeev,Updated: 22 Oct, 2026 08:48 AM

नेस्ले इंडिया ने अपने शिशु पोषण उत्पाद 'लैक्टोजेन प्रो 1' की लेबलिंग से जुड़े एक दावे पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को विस्तृत जवाब सौंप दिया है। नियामक ने इस दावे को साबित करने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण मांगे थे कि उत्पाद में...
नई दिल्ली : नेस्ले इंडिया ने अपने शिशु पोषण उत्पाद 'लैक्टोजेन प्रो 1' की लेबलिंग से जुड़े एक दावे पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को विस्तृत जवाब सौंप दिया है। नियामक ने इस दावे को साबित करने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण मांगे थे कि उत्पाद में मौजूद 'व्हे प्रोटीन' (whey protein) आसानी से पच जाता है। नेस्ले इंडिया के एक प्रवक्ता ने कहा, 'FSSAI की हालिया पोस्ट में उन्हीं बातों को दोहराया गया है, जो 18 सितंबर की पिछली पोस्ट में उत्पाद लेबल के संबंध में कही गई थीं। हमने इस मामले पर FSSAI को अपना विस्तृत जवाब पहले ही सौंप दिया है।'
अपने नए नोटिस में FSSAI ने इस दावे के समर्थन में सबूत मांगे हैं कि 'लैक्टोजेन प्रो 1' में व्हे प्रोटीन होता है, जो दूध के प्रोटीन का ही एक हिस्सा है और "आसानी से पच जाता है"। नियामक ने बताया कि यह दावा उत्पाद की पैकेजिंग और विज्ञापन सामग्री पर देखा गया था। उसने खाद्य कारोबार संचालक (food business operator) को निर्देश दिया है कि वे तय समय-सीमा के भीतर जरूरी दस्तावेज और वैज्ञानिक प्रमाण जमा करें।
यह घटनाक्रम FSSAI द्वारा खाद्य निर्माताओं और अन्य इकाइयों के खिलाफ की जा रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है। इन पर आरोप है कि वे शिशु पोषण उत्पादों के बारे में भ्रामक स्वास्थ्य दावे कर रहे हैं और नियमों के विपरीत प्रचार कर रहे हैं। इससे पहले जारी नोटिसों में नियामक ने रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) और पाचन से जुड़े दावों, तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए शिशु दूध के विकल्पों (infant milk substitutes) के प्रचार पर भी सवाल उठाए थे।
FSSAI ने उन दावों पर चिंता जताई थी जिनमें कहा गया था कि शिशु पोषण उत्पादों में मौजूद कुछ तत्व सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। साथ ही 'व्हे प्रोटीन' के आसानी से पचने वाले दावे के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे थे। इसके अलावा नियामक ने सोशल मीडिया पर किए जा रहे उन प्रचारों पर भी आपत्ति जताई थी, जिनमें शिशु दूध के विकल्पों से संतुलित पोषण, मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता और मस्तिष्क के विकास जैसे लाभ मिलने का दावा किया गया था। नियामक ने कहा कि कुछ प्रचार सामग्री 'इन्फेंट मिल्क सब्स्टिट्यूट्स एक्ट, 1992' (जिसमें 2003 में संशोधन किया गया था) और 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (फूड्स फॉर इन्फेंट न्यूट्रिशन) रेगुलेशंस, 2020' का उल्लंघन कर सकती है। FSSAI ने आगे की कार्रवाई पर फैसला लेने से पहले संबंधित पक्षों से स्पष्टीकरण और सहायक सबूत मांगे हैं।