मैंग्रोव कम होने पर Bombay HC ने जताई चिंता, कहा- एक दिन लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर चलना पड़ेगा

Edited By Updated: 16 Jul, 2026 04:56 PM

one day people will have to carry oxygen cylinders bombay high court

Bombay high Court ने शहर में कम होते मैंग्रोव को लेकर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि है कि अगर हरियाली इसी तरह कम होती रही, तो वह दिन दूर नहीं जब लोगों को "ऑक्सीजन लेने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर" साथ लेकर चलना पड़ेगा। यह टिप्पणी एक्टिंग चीफ जस्टिस...

नेशनल डेस्क: Bombay high Court ने शहर में कम होते मैंग्रोव को लेकर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि है कि अगर हरियाली इसी तरह कम होती रही, तो वह दिन दूर नहीं जब लोगों को "ऑक्सीजन लेने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर" साथ लेकर चलना पड़ेगा। यह टिप्पणी एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (MSETCL) की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। कंपनी ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए पालघर जिले में दहानू से अंबेसारी तक 132 KV ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए 847 मैंग्रोव पेड़ काटने की इजाज़त मांगी थी।

बेंच ने जताई ये चिंता

बेंच ने कहा कि बड़ी चिंता यह नहीं है कि मैंग्रोव काटे जा रहे हैं, बल्कि यह है कि क्या अधिकारी यह पक्का कर रहे हैं कि बदले में लगाए गए पेड़ बचेंगे या नहीं। कोर्ट ने कहा, "समस्या यह है कि आप लोग दोबारा पेड़ नहीं लगाते। जो पेड़ आप लगाते हैं, वे मरने लगते हैं। आप बस यह दिखाते हैं कि आपने कुछ लगाया है। पेड़ लगाने के बाद आप मुड़कर यह नहीं देखते कि वह जीवित है या नहीं।"

कोर्ट ने कहा- जल्द ऑक्सीजन सिलेंडर साथ लेकर चलना पड़ेगा

कोर्ट ने प्रभावित इलाके के बाहर बदले में पेड़ लगाने (कम्पेनसेटरी एफॉरेस्टेशन) के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसी जगह पर पेड़ नहीं लगाए जा सकते जहाँ पहले से ही बहुत सारे पेड़ हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की, "यह इस इलाके के लिए नुकसान है। वैसे भी बॉम्बे में इतनी कम ऑक्सीजन है कि वह दिन दूर नहीं जब लोगों को ऑक्सीजन लेने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर साथ लेकर चलना पड़ेगा।" राज्य की ओर से पेश एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने कहा कि कहीं और पेड़ लगाने के बजाय, सरकार उसी इलाके में खराब हो चुकी वन भूमि की पहचान करेगी जहाँ पेड़ लगाए जा सकें। उन्होंने कहा, "हम खराब हो चुकी वन भूमि की पहचान करेंगे। लेकिन इसमें समय लगेगा।" याचिका में कहा गया है कि प्रस्तावित 13.06 किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन के लिए 3.35 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की ज़रूरत है, जिसमें 1.9656 हेक्टेयर मैंग्रोव वन शामिल हैं।

इसमें दावा किया गया कि तीन वैकल्पिक रास्तों की जांच की गई और अंतिम रास्ता इसलिए चुना गया ताकि जंगलों और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील अन्य इलाकों पर कम से कम असर पड़े। इसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि ट्रांसमिशन लाइन की तत्काल ज़रूरत है क्योंकि प्रधानमंत्री अक्टूबर में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने वाले हैं। 2018 में बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फ़ैसले के बाद, जिसमें कोर्ट की मंज़ूरी के बिना मैंग्रोव को नष्ट करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी, मैंग्रोव काटने से जुड़े सभी सार्वजनिक बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स के लिए कोर्ट की अनुमति ज़रूरी है।

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