Edited By Rahul Rana,Updated: 22 Aug, 2026 03:40 PM

सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है।
Indus Treaty Water: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इक़बाल ने आशंका जताई है कि भारत पानी का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ रणनीतिक हथियार के तौर पर कर सकता है। उनका कहना है कि भारत अगर फसलों के लिए पानी की जरूरत के समय पानी रोकता है और जरूरत न होने पर पानी छोड़ता है, तो इससे पाकिस्तान के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है।
एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में अहसान इक़बाल ने कहा कि सिंधु जल संधि एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है और इसे एकतरफा तरीके से बदला नहीं जा सकता। उनके मुताबिक, भारत सरकार के संधि को स्थगित रखने के फैसले ने पाकिस्तान के सामने एक नई चुनौती पैदा कर दी है।
'पानी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का खतरा'
अहसान इक़बाल ने कहा कि पाकिस्तान के सामने अब यह आशंका है कि भारत पानी के प्रवाह को अपने रणनीतिक हितों के मुताबिक नियंत्रित कर सकता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें फसलों के लिए पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होने पर सप्लाई प्रभावित हो और जरूरत न होने पर पानी छोड़ा जाए।
पाकिस्तानी मंत्री के मुताबिक, देश में बनाए जा रहे बांध इस तरह की संभावित स्थिति में एक तरह के 'बफर' का काम कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान इस खतरे को नजरअंदाज नहीं कर सकता और इसके लिए सभी कूटनीतिक रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
शहबाज शरीफ ने भी दी 'सीधी प्रतिक्रिया' की चेतावनी
सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी भारत को चेतावनी दे चुके हैं। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस से पहले दिए एक संबोधन में शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान शांति चाहता है, लेकिन उसकी इस इच्छा को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
उन्होंने पाकिस्तान के पानी के अधिकार को बेहद अहम बताते हुए कहा कि पानी की हर एक बूंद देश के लिए 'रेड लाइन' है। शरीफ ने चेतावनी दी कि अगर भारत पाकिस्तान की पानी तक पहुंच को खतरे में डालता है, तो इस्लामाबाद इसका सीधा जवाब देगा।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने स्थगित की संधि
सिंधु जल संधि पर मौजूदा विवाद की शुरुआत 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके अगले दिन 23 अप्रैल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित रखने का फैसला किया।
भारत का कहना है कि जिन परिस्थितियों और परिस्थितिजन्य समझ के आधार पर यह संधि हुई थी, वे अब बदल चुकी हैं। नई दिल्ली का रुख है कि संधि तब तक स्थगित रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को विश्वसनीय और पक्के तौर पर समाप्त नहीं करता।