Edited By Radhika,Updated: 15 Jul, 2026 01:42 PM

अगर आप अपनी मौजूदा कंपनी छोड़कर किसी नई कंपनी में शिफ्ट कर गए हैं तो यह आपके लिए काफी काम की खबर होने वाली है। EPFO ने PF ट्रांसफर से जुड़े नियमों में एक बदलाव किया है। इसके अनुसार अब आपको नई कंपनी या नौकरी ज्वाइन करने पर अरने PF बैलेंस के लिए लंबी...
EPFO Rule Change: अगर आप अपनी मौजूदा कंपनी छोड़कर किसी नई कंपनी में शिफ्ट कर गए हैं तो यह आपके लिए काफी काम की खबर होने वाली है। EPFO ने PF ट्रांसफर से जुड़े नियमों में एक बदलाव किया है। इसके अनुसार अब आपको नई कंपनी या नौकरी ज्वाइन करने पर अरने PF बैलेंस के लिए लंबी कार्यवाही करके प्रोसेस से मुक्ति मिल जाएगी। आइए जानते हैं कि क्या है ये नया नियम-
क्या है EPFO का नया ऑटोमैटिक ट्रांसफर नियम?
पहले के नियम के अनुसार जब कोई कर्मचारी अपनी नौकरी बदलता था तो उसे पुरानी नौकरी के पीएफ अकाउंट को ट्रांसफर करने के लिए एक लंबे प्रोसेस से गुजरना पड़ता था। इस प्रक्रिया में कंपनियों द्वारा वेरिफिकेशन और ईपीएफओ की मंजूरी में काफी समय लगता था। अब बदलाव के बाद EPFO ने अत्याधुनिक सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सर्विस (CITES) प्लेटफॉर्म शुरू किया है। इस सिस्टम के तहत, जैसे ही आप नई कंपनी ज्वाइन करेंगे, आपका पुराना पीएफ बैलेंस ऑटोमैटिक रूप से नए PF अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगा। इसके लिए आपको कोई अलग से रिक्वेस्ट की जरुरत नहीं। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं, जो इस प्रकार हैं-
- आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) आपके पहचान प्रमाणीकरण (वेरिफिकेशन) के साथ सही तरीके से लिंक होना चाहिए।
- इसके अलावा आपके PF अकाउंट की KYC अपडेट होनी चाहिए।
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कैसे काम करता है यह नया सिस्टम?
जब आप किसी कंपनी में ज्वाइन करते हैं तो वहां पर आपकी एक कर्मचारी का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) उसके पूरे करियर में एक ही रहता है, लेकिन हर नई कंपनी में ज्वाइन करने पर एक नई PF Member ID बनती है। नए सेंट्रलाइज्ड सिस्टम के जरिए ईपीएफओ इन अलग-अलग आईडी को एक ही यूएएन के तहत खुद-ब-खुद ट्रैक कर लेता है और पिछले बैलेंस को नई आईडी में शिफ्ट कर देता है।
कर्मचारियों को होंगे ये बड़े फायदे
- इस नए सिस्टम के लागू होने से आपको ऑनलाइन पोर्टल पर बार- बार स्टेटस चेक करने की जरुरत नहीं होगी।
- बार- बार नौकरियां बदलने के बावजूद कर्मचारियों को अपनी कुल जमा पूंजी और पेंशन राशि कई खातों में बिखरी हुई देखने के बजाय एक ही स्थान पर इक्ट्ठी मिलेगी।
- एक ही खाते में सारा पैसा रहने से रिटायरमेंट के लिए हो रही कुल बचत पर नजर रखना और उसका ट्रैक रिकॉर्ड बनाए रखना बेहद आसान हो जाएगा।