Edited By Mansa Devi,Updated: 02 Apr, 2026 03:54 PM

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बदलते समय के साथ सिविल सेवाओं को लगातार अद्यतन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बदलते समय के साथ सिविल सेवाओं को लगातार अद्यतन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने 'साधना सप्ताह' कार्यक्रम की शुरुआत पर एक वीडियो संदेश में कहा कि देश के शासन को नागरिकों के लिए दैनिक आधार पर जीवनयापन की सुगमता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना चाहिए।
मोदी ने कहा कि देश में शासन का सिद्धांत 'नागरिक देवो भव:' के मंत्र पर आधारित है। उन्होंने कहा कि सामूहिक भावना के साथ यह मंत्र सार्वजनिक सेवाओं को अधिक सक्षम और नागरिकों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने का लक्ष्य रखता है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''जब हम प्रशासनिक सेवाओं में सुधार और बदलाव की बात करते हैं तो उसका एक आशय है कि लोक सेवकों के व्यवहार में बदलाव।
हम सभी जानते हैं कि पुरानी व्यवस्था में जोर अधिकार होने पर ज्यादा होता था लेकिन आज देश का जोर कर्तव्य भावना पर ज्यादा है।'' उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रयासों को 2047 के 'विकसित भारत' के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''देश के विकास पथ पर हमारे (सिविल सेवकों) द्वारा किए जा रहे कार्यों का क्या प्रभाव पड़ेगा? हमारे एक निर्णय से कितने नागरिकों का जीवन बदल सकता है हमारा व्यक्तिगत परिवर्तन संस्थागत परिवर्तन कैसे बन सकता है यह प्रश्न हमारे हर प्रयास का हिस्सा होना चाहिए।''
मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी को समझना और उसका सही उपयोग करना सार्वजनिक सेवा का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''आप तभी बेहतर प्रशासक और बेहतर लोक सेवक बन सकते हैं जब आप प्रौद्योगिकी और डेटा को समझें। यही आपके निर्णय लेने का आधार बनेगा, इसलिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में क्षमता निर्माण और निरंतर सीखने को बढ़ावा देने के लिए काम किया जा रहा है।''
साधना (राष्ट्रीय उन्नति के लिए अनुकूल विकास और मानवीय योग्यता को मजबूत करना) सप्ताह का आयोजन क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) द्वारा दो से आठ अप्रैल तक किया जा रहा है। यह सप्ताह भारत के सिविल सेवा तंत्र में सबसे बड़े सहयोगी क्षमता निर्माण प्रयासों में से एक है। यह आयोग शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, नागरिक-केंद्रित और भविष्य के लिए तैयार बनाने हेतु रूपरेखा तैयार करता है, मानक निर्धारित करता है और सहयोग को प्रोत्साहित करता है। यह क्षमता विकास और योग्यता पर आधारित शिक्षा के माध्यम से सिविल सेवा सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए मिशन कर्मयोगी रूपरेखा का संरक्षक है।