मुहर्रम में ज़हर देने का मामला: टूटा हुआ परिवार और अकेलेपन की वजह से आरोपी ने बदला लेने की रची साज़िश

Edited By Updated: 30 Jun, 2026 03:30 PM

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मुंबई में मुहर्रम के जुलूस के दौरान कथित तौर पर ज़हर मिलाने की साज़िश की जांच में नए खुलासे सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि इस मामले के आरोपी 39 वर्षीय फ़ैयाज़ निसार हुसैन प्रेमजी पिछले एक साल से अधिक समय से इस धार्मिक आयोजन का इंतज़ार कर रहा था...

मुंबई में मुहर्रम के जुलूस के दौरान कथित तौर पर ज़हर मिलाने की साज़िश की जांच में नए खुलासे सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि इस मामले के आरोपी 39 वर्षीय फ़ैयाज़ निसार हुसैन प्रेमजी पिछले एक साल से अधिक समय से इस धार्मिक आयोजन का इंतज़ार कर रहा था और कथित रूप से अपने ही समुदाय के कुछ लोगों के प्रति नाराज़गी रखता था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, पूछताछ में प्रेमजी ने दावा किया कि उसका इरादा किसी की हत्या करना नहीं था, बल्कि लोगों को असुविधा और परेशानी पहुंचाना था। पुलिस के अनुसार, उसने पहले कथित तौर पर यह जांचने के लिए एक परीक्षण भी किया था कि ज़हर की कितनी मात्रा घातक हो सकती है। इसके बाद उसने कथित रूप से एक-एक ग्राम के कैप्सूल तैयार किए, ताकि उन्हें खाने से किसी की मौत न हो।

मुंबई पुलिस की जांच के अनुसार, पिछले कुछ सालों में प्रेमजी की पर्सनल लाइफ में बुरा असर पड़ा था। अधिकारियों का दावा है कि उसकी शादी टूट गई थी, समुदाय के लोगों द्वारा परिवार को कथित तौर पर समाज से अलग-थलग (बहिष्कृत) किए जाने के बाद वह सामाजिक रूप से अकेला पड़ गया था, और वह मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था तथा कई तरह की दवाइयां भी ले रहा था।

 पुलिस के अनुसार, प्रेमजी ने पहले मुसलमानों द्वारा अपनाई जाने वाली कुछ धार्मिक प्रथाओं का विरोध करते हुए पर्चे बांटे थे। जांचकर्ताओं का दावा है कि इसी वजह से धार्मिक नेताओं ने कथित तौर पर उसके परिवार को समुदाय से बहिष्कृत कर दिया था। सामाजिक बहिष्कार के बाद, प्रेमजी अपनी मां, बड़े भाई मोहम्मद अब्बास और दो छोटी बहनों, सकीना और रूबीना के साथ पुणे चला गया, जबकि कभी-कभी मुंबई आता-जाता रहता था, जहां वह सस्ते होटलों या डॉरमेट्री में रुकता था।

पुलिस ने बताया कि प्रेमजी के पास बैचलर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की डिग्री है और उसकी शादी हुई थी, लेकिन उसकी पत्नी ने उसे लगभग चार साल पहले छोड़ दिया था। जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि परिवार के साथ खराब रिश्तों और रिश्तेदारों द्वारा नज़रअंदाज़ किए जाने की भावना ने उसके मानसिक स्वास्थ्य पर और बुरा असर डाला।

पुलिस के अनुसार, प्रेमजी और उसका परिवार 2019 में ईरान चले गए, जहां उसने फास्ट-फूड का कारोबार शुरू किया। परिवार 2025 में पुणे लौट आया। पूछताछ के दौरान, प्रेमजी ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को बताया कि उसके दादाजी ने भी शिया समुदाय के भीतर कठोर मानी जाने वाली प्रथाओं के खिलाफ़ अभियान चलाया था, पुलिस का मानना ​​है कि इससे उसकी सोच पर असर पड़ा होगा।

पुलिस का दावा: महीनों पहले रची थी साज़िश
जांचकर्ताओं का आरोप है कि 2025 में पुणे लौटने के बाद, प्रेमजी ने मुहर्रम जुलूस का इंतज़ार करते हुए हमले की योजना बहुत पहले ही बनानी शुरू कर दी थी। पुलिस का दावा है कि उसने यूट्यूब वीडियो समेत ऑनलाइन ज़रीयों से कैप्सूल बनाना सीखा और लगभग 30,000 कैप्सूल तैयार किए।

पुलिस का यह भी आरोप है कि मुहर्रम जुलूस से लगभग दो हफ़्ते पहले, प्रेमजी जुलूस के रास्ते के पास एक सस्ते होटल में रुका था। वहां रहने के दौरान, उसने कथित तौर पर एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए लगभग 30,000 खाली कैप्सूल और लगभग 50 किलोग्राम जिंक फॉस्फाइड (चूहे मारने की बहुत ज़हरीली दवा) मंगवाई और कई दिनों तक अपने होटल के कमरे में कैप्सूल भरने का काम किया।

जांचकर्ताओं का दावा है कि प्रेमजी ने अपनी निजी मुश्किलों, जैसे कि अपनी टूटी शादी और पारिवारिक समस्याओं के लिए अपने ही समुदाय के लोगों को ज़िम्मेदार ठहराया और कथित तौर पर मुंबई के बायकुला और डोंगरी इलाकों में मुहर्रम जुलूस के दौरान एक खास पंथ के मानने वालों को निशाना बनाने का फ़ैसला किया।

पुलिस के मुताबिक, प्रेमजी को जुलूस में शामिल लोगों के बीच एक बैग से कैप्सूल बांटते हुए देखा गया। जब सुरक्षाकर्मियों ने उससे पूछताछ की, तो उसने कथित तौर पर दावा किया कि कैप्सूल दर्द निवारक (पेनकिलर) थे, जिनका मकसद जुलूस के दौरान घायल होने वालों की मदद करना था। इसके कुछ ही देर बाद, दो लोगों ने कैप्सूल खाने के बाद उल्टी और बेचैनी की शिकायत की। पुलिस ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों को जानकारी दी कि उन्हें ये कैप्सूल प्रेमजी से मिले थे।

30,000 कैप्सूल और 50 किलो जिंक फॉस्फाइड खरीदने का आरोप

इसके बाद प्रेमजी को डोंगरी के एक होटल से हिरासत में ले लिया गया। तलाशी के दौरान, पुलिस ने बताया कि उन्हें 14,900 कैप्सूल मिले, जिनमें कथित तौर पर जिंक फॉस्फाइड पाउडर भरा हुआ था। जांचकर्ताओं का यह भी दावा है कि उन्होंने पता लगा लिया है कि उसने लगभग 30,000 खाली कैप्सूल और लगभग 50 किलोग्राम ज़हरीला केमिकल खरीदा था।

पुलिस ने बताया कि प्रेमजी अभी हिरासत में है और उससे पूछताछ की जा रही है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उसकी मानसिक स्थिति और निजी शिकायतों ने इस कथित साज़िश में कोई अहम भूमिका निभाई।

अधिकारियों ने बताया कि अभी तक किसी भी आतंकी संगठन से जुड़ाव का पता नहीं चला है। हालांकि प्रेमजी ने इराक और ईरान की काफ़ी यात्राएं की थीं, लेकिन जांचकर्ताओं का कहना है कि फिलहाल उसके किसी चरमपंथी संगठन या कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े होने का कोई सबूत नहीं मिला है। फिर भी, सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है और उसके हालिया इंटरनेट इस्तेमाल, बातचीत और ऑनलाइन सर्च की जांच के लिए उसके मोबाइल फ़ोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

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