2021 चुनाव बाद हिंसाः 5 साल बाद खुलेगा मौ/त का राज, कब्र से निकाला गया BJP कार्यकर्ता का कंकाल

Edited By Updated: 14 Sep, 2026 12:42 PM

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पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में 2021 में चुनाव बाद हुई हिंसा में कथित तौर पर मारे गए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक कार्यकर्ता के कंकाल के अवशेष अदालत के आदेश पर पांच साल बाद कब्र से निकाले गए। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

कोलकाताः पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में 2021 में चुनाव बाद हुई हिंसा में कथित तौर पर मारे गए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक कार्यकर्ता के कंकाल के अवशेष अदालत के आदेश पर पांच साल बाद कब्र से निकाले गए। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी के अनुसार, 2021 के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के दिन झनझनिया गांव के निवासी आस्तिक चंद्र दास पर कथित तौर पर विजय जुलूस निकाल रहे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) समर्थकों ने हमला किया था। उनके बेटे सुब्रत दास ने आरोप लगाया कि हमले में उनके पिता गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें विशेष उपचार के लिए अस्पताल ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद उनकी घर पर ही मौत हो गई।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उनके घर के बाहर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था और उन्हें शव को दफनाने के लिए मजबूर किया गया। परिवार के मुताबिक, शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद परिवार ने एक नई शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद अदालत ने शव को कब्र से निकालने का आदेश दिया।

उन्होंने कहा कि रविवार को मजिस्ट्रेट और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में कंकाल के अवशेष कब्र से निकाले गए। नाजाट थाने के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई और मौत के कारण का पता लगाने के लिए अवशेषों को पोस्टमार्टम तथा फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। परिवार ने जरूरत पड़ने पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से विस्तृत जांच कराने और मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह घटना 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर झेलनी पड़ी ज्यादतियों का प्रमाण है। उस चुनाव में टीएमसी ने बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्होंने कहा, ''टीएमसी के शासन में आतंक का माहौल था और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। हमें पता है कि न्याय होगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिलेगी।'' पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का एक गांव संदेशखाली 2024 में उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया था, जब बड़ी संख्या में महिलाओं ने स्थानीय टीएमसी नेता शाहजहां शेख पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किए थे। 

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