Edited By Ramkesh,Updated: 29 May, 2026 01:10 PM

उच्च न्यायालयों में बढ़ते लंबित मामलों के बोझ को कम करने के लिए अब वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) प्रणाली को बढ़ावा देने की पहल तेज हो गई है। हाल ही में संसदीय समिति ने केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को सिफारिश करते हुए कहा है कि जिन उच्च न्यायालयों...
नेशनल डेस्क: उच्च न्यायालयों में बढ़ते लंबित मामलों के बोझ को कम करने के लिए अब वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) प्रणाली को बढ़ावा देने की पहल तेज हो गई है। हाल ही में संसदीय समिति ने केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को सिफारिश करते हुए कहा है कि जिन उच्च न्यायालयों में मुकदमों का दबाव अधिक है, वहां लोक अदालत, मध्यस्थता (Mediation) और आर्बिट्रेशन जैसी वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि देश के अधिकांश उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों में सिविल केसों की संख्या सबसे ज्यादा है, जबकि आपराधिक मामलों की लंबित संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। समिति का मानना है कि पारंपरिक न्यायिक प्रक्रिया पर बढ़ते दबाव को कम करने और मामलों के तेजी से निपटारे के लिए ADR प्रणाली बेहद कारगर साबित हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लोक अदालतों, मध्यस्थता और आर्बिट्रेशन को बढ़ावा देने से न केवल अदालतों का बोझ कम होगा, बल्कि आम लोगों को भी सस्ता और त्वरित न्याय मिल सकेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक
- 64,24,000 उच्च न्यायालयों में मामले ।
- 44,93,000 सिविल मामले
- आपराधिक मामले 19,30,000
पटना हाईकोर्ट के लिए कानून मंत्रालय को समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इन मामलों को आर्बिट्रेशन, मध्यस्थता, आपसी सुलह और लोक अदालतों में भेजा जा सकता है। समिति ने कहा कि सिविल विवादों को अदालत में सुनवाई से पहले मध्यस्थता मीडिएशन को अनिवार्य बनाने से भी लंबित मामलों को कम करने में मदद मिलती है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में सबसे अधिक मामले लंबित
- इलाहाबाद हाईकोर्ट 6. 86
- बॉम्बे हाईकोर्ट 6.42
- मद्रास हाईकोर्ट5. 73
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट 4.76
- पंजाब एवं हरियाणा 4. 19
- पटना हाईकोर्ट2. 20
- दिल्ली हाईकोर्ट 1.23
(लंबित मामले लाख में)
मुकदमों के निपटारे में तेजी पर्याप्त नहीं
संसदीय समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि लंबित मामलों की समस्या को खत्म करने में सिर्फ तेजी से मामलों का निपटारा ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए जजों के खाली पदों को समय पर भरना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, मामलों का बेहतर प्रबंधन करना और तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने जैसे त्वरित कदम उठाने की जरूरत है।
सूत्रों के मुताबिक, संसदीय समिति की इस रिपोर्ट के बाद अब कानून मंत्रालय उच्च न्यायालयों में लंबित मुकदमों के निपटारा के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान यानी मध्यस्थता, आर्बिट्रेशन, आपसी सुलह के साथ-साथ लोक अदालत में मामलों को भेजने के लिए रूपरेखा तैयार कर रही है। मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि जल्द ही इस बारे में औपचारिक निर्देश जारी किए जाएंगे।